Sawan 2025: सुबह से गूंजेगा हर-हर महादेव, चारों तरह बोल बम का लगेगा जयकारा, जानें व्रत पूजा का खास संयोग

Published by : Radheshyam Kushwaha Updated At : 10 Jul 2025 8:55 PM

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Sawan 2025

Sawan 2025: सावन मास का आरंभ सुबह 11 जुलाई 2025 दिन शुक्रवार से शुरू हो रहा है. वहीं सावन मास की समाप्ति 09 अगस्त 2025 दिन शनिवार से होगी. इस साल सावन मास की शुरुआत में ही कुछ शुभ योग मिलेंगे. श्रावण माह की प्रतिपदा तिथि को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के पश्चात उत्तराषाढ़ा नक्षत्र भी रहेगा. इसबार सावन मास में कुल चार सोमवार पड़ रहे है.

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Sawan 2025: शिवभक्तों के लिए सबसे प्रिय मास सावन का शुभारंभ शुक्रवार को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र और वैधृति योग में हो रहा है. इस बार सावन मास विशेष इसलिए भी है क्योंकि इसमें चार सोमवारी का संयोग बन रहा है. यह महीना शिव उपासना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का सबसे पवित्र अवसर माना जाता है. सावन मास आज से शुरू होकर 9 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ संपन्न होगा. राजधानी पटना समेत पूरे राज्य में शिवालयों को पत्र-पुष्प और रंग-बिरंगे बल्बों से सजाया गया है. आज से ही शिव भक्त मंदिरों में जलार्पण, पार्थिव पूजन और रुद्राभिषेक के लिए उमड़ने लगे हैं. घर-घर में भी भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की जा रही है.

चार सोमवारी का बना खास संयोग

ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि सावन मास शिव उपासना के लिए सर्वोत्तम समय है. सूर्य के दक्षिणायन होते ही सावन का महीना आरंभ होता है, जिसका संचालन स्वयं भगवान शिव करते हैं. इस बार चार सोमवारी का योग भक्तों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है. पहली सोमवारी 14 जुलाई को, दूसरी 21 जुलाई, तीसरी 28 जुलाई और चौथी व अंतिम सोमवारी 4 अगस्त को पड़ेगी.

मिथिला में मधुश्रावणी व्रत की तैयारी शुरू

मिथिलांचल में सावन मास का विशेष महत्व है. यहां नवविवाहित महिलाएं मधुश्रावणी व्रत करती हैं, जो श्रावण कृष्ण पंचमी से शुरू होकर पंद्रह दिनों तक चलता है. इस बार मधुश्रावणी 15 जुलाई से आरंभ होगा. इस अनुष्ठान में नवविवाहिताएं अपने पति की दीर्घायु और दांपत्य सुख के लिए माता गौरी, भगवान शिव और नागिन विषहरी की पूजा करती हैं.

नंदी पूजा से पूरी होती है मनोकामना

पंडित राकेश झा बताते हैं कि सावन में शिव-पार्वती पूजा के बाद नंदी की पूजा अवश्य करनी चाहिए. मान्यता है कि नंदी भगवान शिव के प्रिय वाहन और प्रथम भक्त हैं. भक्त अपनी इच्छाएं नंदी के कान में कहकर शीघ्र फल प्राप्त करते हैं.

विविधताओं से भरपूर शिव पूजा : शिव पूजा में श्रद्धालु जल, दूध, दही, घी, शहद, पंचामृत, गन्ना रस, अनार रस से अभिषेक करते हैं. फिर वस्त्र, चंदन, भस्म, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र आदि से भोलेनाथ का शृंगार करते हैं.

महावीर मंदिर में रुद्राभिषेक की तैयारी पूरी

पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर में इस वर्ष सावन के पवित्र महीने के लिए श्री रुद्राभिषेक की व्यापक तैयारी पूरी कर ली गयी है. मंदिर प्रशासन के अनुसार गुरुवार तक श्री रुद्राभिषेक के लिए अब तक 1280 बुकिंग हो चुकी हैं. सावन के प्रथम सोमवार से लेकर महाशिवरात्रि तक भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है. इसी को देखते हुए इस बार महावीर मंदिर में एक अतिरिक्त शिवलिंग की स्थापना की जा रही है. मंदिर परिसर में पहले से ही तीन शिवलिंग स्थापित हैं, वहीं इस बार चौथा शिवलिंग मंदिर की सबसे ऊपरी मंजिल पर स्थापित किया जा रहा है. इससे भक्तों को चार स्थानों पर श्री रुद्राभिषेक का लाभ मिलेगा.

चार शिवलिंगों पर होगी पूजा

महावीर मंदिर न्यास समिति के सदस्य सायण कुणाल ने बताया कि भक्तों की बढ़ती संख्या और सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है. सावन में श्री रुद्राभिषेक के लिए सोमवारी और महाशिवरात्रि के दिन 2750 रुपए तथा अन्य दिनों में 2310 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है. भक्तों को पूजा सामग्री लाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी. सारी सामग्री मंदिर प्रशासन द्वारा ही उपलब्ध कराई जायेगी. मंदिर प्रशासन ने पूजा के दौरान भीड़ नियंत्रण और भक्तों की सुविधा के लिए अतिरिक्त पंडाल, लाइन और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की है. बुकिंग अब भी जारी है और श्रद्धालुओं में इसे लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है.

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.

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