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48 साल बाद भी कमलदह और स्थूलीभद्र की साधना स्थली उपेक्षित

Updated at : 29 Dec 2024 1:00 AM (IST)
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48 साल बाद भी कमलदह और स्थूलीभद्र की साधना स्थली उपेक्षित

कमलदह जैन मंदिर गुलजारबाग रेलवे स्टेशन के पास स्थित है. जैन शास्त्रों में कमलदह जी को सिद्धक्षेत्र माना जाता है. यह जैन धर्मावलंबियों का महत्वपूर्ण स्थल है.

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सुबोध कुमार नंदन, पटना कमलदह जैन मंदिर गुलजारबाग रेलवे स्टेशन के पास स्थित है. जैन शास्त्रों में कमलदह जी को सिद्धक्षेत्र माना जाता है. यह जैन धर्मावलंबियों का महत्वपूर्ण स्थल है. यहां दिगंबर जैन मुनि सुदर्शन स्वामी का मंदिर व श्वेतांबर जैन संत स्थूलीभद्र जी की साधना स्थली है. यह देश के सबसे पुराने जैन मंदिरों में से एक है. यहां अनेक जैन-मुनियों व जैन आचार्यों ने तप व साधना की है. यह मंदिर बिहार के जैन सर्किट का भी हिस्सा है. बिहार पुरातत्व निदेशालय द्वारा 1976 में इसे सुरक्षित स्मारक की सूची में शामिल गया है. इसके बाद भी राजधानी से महज 12 किमी दूर स्थित यह स्मारक और पुरातत्व स्थल उपेक्षित है. आज तक यहां संरक्षण का काम नहीं हो पाया है. स्मारक और मंदिर की दीवारें ढह रही हैं. जो सूचना पट्ट लगाये गये हैं उसे पद वह झाड़ उग गये हैं. सरोवर के पानी से बदबू का साम्राज्य है. इतना ही नहीं सरोवर बिना चहारदीवारी का है. लोग बिना रोक-टोक के आते-जाते हैं. दिगंबर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के महामंत्री पराग जैन की मानें, तो जिस समय मंदिर का निर्माण यहां हुआ था, उस दौरान इस जगह पर बहुत सारे तालाब हुआ करते थे. कमल के फूलों से घिरे होने से इसका नाम कमलदह मंदिर पड़ा. यह 50 सालों से उपेक्षित है. जैन श्वेतांबर मंदिर समिति के अध्यक्ष राजन वैद्य ने बताया कि इसके विकास के लिए सरकार से मिलने वाले हैं. मनेगा सुदर्शन स्वामी का निर्वाण महोत्सव : मान्यता है कि कमल सरोवरों व पेड़ों के बीच टीले पर दिगंबर जैन महामुनि सुदर्शन का निर्वाण हुआ था. इसे लेकर चार जनवरी को यहां सुदर्शन स्वामी का निर्वाण महोत्सव मनाया जायेगा. कराया जायेगा सर्वे : कमलदह की स्थिति का सर्वे कराया जायेगा. जो जरुरत होगी, उस पर कार्रवाई की जायेगी.

दया निधान पांडेय, सचिव, बिहार कला, संस्कृति एवं युवा विभाग

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