पटना: अब आरपीएफ में होगी नारकोटिक्स खोजी डॉग की एंट्री, नशीले पदार्थों की तस्करी पर कसेगा शिकंजा

Edited by Rajeev Kumar
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रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ.

Patna News : डॉग को एक वर्ष का विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उसे प्रमुख स्टेशनों पर तैनात किया जायेगा.

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पटना से आनंद तिवारी की रिपोर्ट
Patna News : रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) पूर्व मध्य रेलवे के डॉग स्क्वॉड को और आधुनिक बनाने की तैयारी में जुट गया है. जल्द ही आरपीएफ के बेड़े में नारकोटिक्स खोजी डॉग को शामिल किया जायेगा, जो रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में नशीले पदार्थों की तस्करी पर नजर रखेगा. इसके लिए संबंधित डॉग को एक वर्ष का विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उसे प्रमुख स्टेशनों पर तैनात किया जायेगा.

दो से तीन प्रशिक्षित हैंडलर की होगी तैनाती

पूर्व मध्य रेलवे में वर्तमान में स्निफर और ट्रैकर डॉग सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं. अब इनके साथ नारकोटिक्स खोजी डॉग की तैनाती होने से नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. सूत्रों के अनुसार डॉग की तैनाती आठ से नौ वर्षों के लिए की जायेगी. उसकी देखभाल और संचालन के लिए दो से तीन प्रशिक्षित हैंडलर भी तैनात रहेंगे.

नेपाल सीमा से आने वाली तस्करी पर रहेगी विशेष नजर

जानकारों के अनुसार बिहार और नेपाल से सटे क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की तस्करी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है. सीमावर्ती इलाकों के रास्ते बिहार के विभिन्न जिलों तक मादक पदार्थों की आपूर्ति की जाती है. ऐसे में नारकोटिक्स खोजी डॉग रेलवे मार्ग से होने वाली तस्करी की पहचान करने में अहम भूमिका निभाएंगे.

फिटनेस के आधार पर बढ़ेगी सेवा अवधि

सूत्रों की मानें तो यदि डॉग पूरी तरह फिट और सक्रिय रहता है तो उसकी सेवा अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है. एक डॉग पर प्रतिमाह करीब दो से ढाई लाख रुपये खर्च होते हैं. इसमें भोजन, चिकित्सा, प्रशिक्षण और हैंडलरों का खर्च शामिल है. नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ हैंडलरों को भी समय-समय पर एंटी रैबीज वैक्सीन दी जाती है.

यात्रियों की सुरक्षा होगी और मजबूत

एक आरपीएफ अधिकारी ने बताया कि लैब्राडोर और जर्मन शेफर्ड जैसे खोजी डॉग विस्फोटक और संदिग्ध वस्तुओं को पहचानने में बेहद सक्षम होते हैं. रेलवे स्टेशनों पर एंटी-सैबोटेज जांच, गश्त और सुरक्षा अभियानों में ये आरपीएफ जवानों की महत्वपूर्ण सहायता करते हैं. लावारिस बैग, संदिग्ध सामान और संभावित खतरे की पहचान करने में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है.

नशीले पदार्थों की बरामदगी में मिलेगी सटीक सफलता

पटना जंक्शन, दानापुर समेत पूर्व मध्य रेलवे के व्यस्त स्टेशनों पर सुरक्षा को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है. नारकोटिक्स खोजी डॉग की मदद से अवैध शराब, गांजा और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी का आसानी से पता लगाया जा सकेगा. वर्तमान में अधिकतर कार्रवाई खुफिया सूचनाओं के आधार पर होती है, लेकिन कई बार सटीक जानकारी के अभाव में तस्कर बच निकलते हैं. ऐसे में प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड नशीले पदार्थों की बरामदगी में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

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