प्रोस्टेट व हड्डी के कैंसर मरीजों के लिए राहत भरी खबर, अब IGIMS में होगा एकदम सटीक इलाज

Updated at : 29 Jan 2025 4:20 AM (IST)
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Patna IGIMS: अब IGIMS में प्रोस्टेट व न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर से पीड़ित मरीजों का और सटीक इलाज मिलेगा. इससे बोन कैंसर के मरीजों को दर्द से राहत भी मिलेगी.

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आनंद तिवारी/ पटना शहर के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में प्रोस्टेट व न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर बीमारी का इलाज कराने आ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है. क्योंकि अब संस्थान में प्रोस्टेट व न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर से पीड़ित मरीजों का और सटीक इलाज मिलेगा. इससे बोन कैंसर के मरीजों को दर्द से राहत भी मिलेगी. न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी से इलाज शुरू करने की तैयारी की गयी है. ऐसे में अब यहां प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित मरीजों को नयी दवा से इलाज मुहैया कराया जायेगा. विशेषज्ञों के अनुसार सब कुछ ठीक रहा, तो यह सुविधा अगले महीने से शुरू कर दी जायेगी.

अभी तक पीइटी स्कैन समेत दूसरी जांच से होता है इलाज

जानकारों के अनुसार वर्तमान में पीइटी स्कैन समेत दूसरी जांच करने के बाद मरीजों का इलाज किया जाता है. जांच के साथ अब कैंसर मरीजों का इलाज भी होगा. रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी से मेटास्टेटिक प्रोस्टेट कैंसर, न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर और कैंसर मेटास्टेसिस से होने वाले गंभीर हड्डी के दर्द से जूझ रहे मरीजों के लिए नयी उम्मीद जगी है. वहीं आईजीआईएमएस के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मनीष मंडल ने बताया कि संस्थान में कई आधुनिक सुविधाओं का विस्तार मरीजों के लिए किया गया है. उन्होंने बताया कि कुछ कैंसर जो हड्डी तक पहुंच जाते हैं. इसमें मरीज को भीषण दर्द होता है. रेडियोन्यूक्लाइड्स हड्डी के दर्द को कम करने में प्रभावी होते हैं. वे इलाज विशेष रूप से हड्डी में कैंसरयुक्त घावों को लक्षित करते हैं. साथ ही दर्द व सूजन को भी कम करते हैं.

दो माह तक रहता है दवा का असर

विशेषज्ञों ने बताया कि संबंधित दोनों बीमारियों के इलाज में थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है. थेरेपी में एक दवा का प्रयोग किया जाता है. इलाज के दौरान दी जाने वाली दवा का असर दो महीने तक रहता है. एक बार दवा देने पर तीन महीने बाद रोगी को फिर से बुलाकर खून की जांच की जाती है. जांच रिपोर्ट से स्थिति का आकलन किया जाता है. थेरेपी में दवा का खर्च करीब 50 हजार तक आता है. पूरी रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी के दौरान किसी मरीज को एक से दो तो किसी को अधिकतम छह बार दवा दी जाती है.

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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