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बिहार में रामायण सर्किट को मिलेगा नया आयाम, पुनौराधाम से अहिल्या स्थान तक धार्मिक स्थलों का होगा भव्य विकास

Updated at : 03 May 2025 9:31 AM (IST)
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ramayana circuit news| Along with Ramayana Circuit in Bihar, Punauradham and Ahilya Sthan will also be developed grandly

पूनौराधम की तस्वीर

Ramayana Circuit: बिहार में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य सरकार रामायण सर्किट से जुड़े प्रमुख स्थलों को विश्वस्तरीय स्वरूप देने की योजना पर काम कर रही है. जिसमें सीतामढ़ी का पुनौराधाम, मधुबनी का फूलहर और दरभंगा का अहिल्या स्थान प्रमुख रूप से शामिल हैं.

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Ramayana Circuit: बिहार सरकार ने राज्य में धार्मिक पर्यटन को नई उड़ान देने के लिए रामायण सर्किट से जुड़े सभी स्थलों को विश्वस्तरीय रूप देने की दिशा में बड़ी पहल शुरू कर दी है. धार्मिक महत्व के इन स्थलों का विकास न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी योजनाएं तैयार की गई हैं.

इस दिशा में सबसे प्रमुख योजना सीतामढ़ी जिले के पुनौराधाम को लेकर है, जिसे माता सीता की जन्मस्थली माना जाता है. सरकार ने इसे अयोध्या के राम जन्मभूमि की तर्ज पर विकसित करने का निर्णय लिया है. इस कार्य के लिए डिजाइन कंसल्टेंट के रूप में मेसर्स डिजाइन एसोसिएट्स इन कॉरपोरेटेड को जिम्मेदारी सौंपी गई है. वर्तमान में मंदिर परिसर में 17 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जबकि इसके वृहद विकास के लिए अतिरिक्त 50 एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है.

सीताकुंड स्थल का होगा पुनर्विकास

वहीं, पूर्वी चंपारण जिले के सीताकुंड स्थल के पुनर्विकास को भी मंजूरी मिल चुकी है. इस पवित्र स्थल को श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक और आकर्षक बनाया जाएगा. योजना के तहत यहां प्रवेश द्वार, कैफेटेरिया, जनसुविधाएं, दुकानों का निर्माण और पूरे परिसर का सौंदर्यीकरण किया जाएगा.

पंथपाकर को दिया जाएगा भव्य रूप

सीतामढ़ी जिले का एक और महत्वपूर्ण स्थल पंथपाकर, जहां मान्यता है कि सीता की डोली राम के साथ अयोध्या जाते समय रुकी थी, को भी भव्य रूप दिया जाएगा. यहां मंदिर परिसर का विस्तार, थीमेटिक प्रवेश द्वार, घाटों का निर्माण, तालाब का जीर्णोद्धार और अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा.

फूलहर और अहिल्या स्थान मंदिर परिसर का भी होगा कायाकल्प

धार्मिक स्थलों के इस विकास क्रम में मधुबनी जिले का फूलहर भी शामिल है, जहां राम और सीता का प्रथम मिलन हुआ था. इस स्थान को एक आध्यात्मिक और भव्य स्वरूप देने की योजना बनाई गई है. इसके अलावा, दरभंगा के अहिल्या स्थान मंदिर परिसर का भी कायाकल्प होगा. मंदिर परिसर को सुंदर, स्वच्छ और श्रद्धालुओं के अनुकूल बनाने के लिए विभिन्न संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे.

राज्य सरकार की यह पहल धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगी और इससे न केवल बिहार की आध्यात्मिक विरासत को सहेजा जाएगा, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे. रामायण सर्किट का यह विकास प्रदेश को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की ओर एक अहम कदम है.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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