पोर्टल बंद होने से पटना जिला परिषद की 350 विकास योजनाएं अटकीं, 10 करोड़ के काम पर लगा ब्रेक
सांकेतिक तस्वीर
Patna Zila Parishad Projects: पोर्टल बंद होने से पटना जिला परिषद की 350 विकास योजनाएं अटकीं, 10 करोड़ के काम पर लगा ब्रेक… योजनाओं का काम समय पर पूरा नहीं होने से आने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला परिषद सदस्यों की परेशानी बढ़ सकती है. विकास कार्यों में देरी होने पर जनप्रतिनिधियों को जनता के सवालों का सामना करना पड़ सकता है.
पटना से प्रमोद झा की रिपोर्ट
Patna Zila Parishad: पटना जिला परिषद के सदस्यों द्वारा अनुशंसित 350 जनहित योजनाओं का काम पोर्टल पर अपलोड नहीं होने से अटक गया है. पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से पोर्टल बंद रहने के कारण योजनाओं को अपलोड करने में परेशानी हो रही है. इससे विकास कार्यों के क्रियान्वयन पर असर पड़ा है.
10 करोड़ रुपये की राशि से होना है निर्माण कार्य
जिला परिषद की साधारण बैठक में इन योजनाओं को मंजूरी दी गई थी. इनका क्रियान्वयन षष्ठम राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली लगभग 10 करोड़ रुपये की राशि से किया जाना है. योजनाओं में पीसीसी सड़क, नाली, शौचालय, आहर-पइन और स्कूलों की चहारदीवारी निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं.
एनआईसी पोर्टल बंद रहने से बढ़ी परेशानी
जानकारों के अनुसार एनआईसी डॉट इन का पोर्टल बंद रहने के कारण योजनाओं को अपलोड नहीं किया जा सका है. जिला परिषद सदस्यों का कहना है कि छोटी और बड़ी दोनों तरह की योजनाएं लंबित हैं. पोर्टल पर अपलोड नहीं होने से योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आ रही है.
बरसात के कारण और बढ़ सकती है देरी
बरसात का मौसम शुरू हो चुका है. ऐसे में यदि जल्द प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो विकास कार्यों के शुरू होने में दो महीने या उससे अधिक की देरी हो सकती है. इसका सीधा असर आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ेगा.
विभागीय स्तर पर किया गया आग्रह
पटना जिला परिषद अध्यक्ष कुमारी स्तुति गुप्ता ने बताया कि सदस्यों द्वारा अनुशंसित योजनाओं का काम षष्ठम राज्य वित्त आयोग की राशि से होना है. योजनाएं अपलोड नहीं होने के कारण भुगतान प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है. इसे लेकर पंचायती राज विभाग के सचिव को पत्र लिखकर विभागीय पोर्टल खोलने और योजनाओं को अपलोड कराने का आग्रह किया गया है.
चुनाव से पहले बढ़ सकती है जनप्रतिनिधियों की मुश्किल
योजनाओं का काम समय पर पूरा नहीं होने से आने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला परिषद सदस्यों की परेशानी बढ़ सकती है. विकास कार्यों में देरी होने पर जनप्रतिनिधियों को जनता के सवालों का सामना करना पड़ सकता है.
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