PHOTOS: तस्वीरों से समझें पटना के शिवधामों की अनसुनी कहानी, 1200 रुद्र से 108 फीट के अर्धनारीश्वर तक

पटना के शिव मंदिर

चंदासी गांव स्थित अर्धनारीश्वर धाम में 108 फीट ऊंची भगवान शिव-पार्वती की संयुक्त प्रतिमा
चंदासी का अर्धनारीश्वर धाम, जहां 108 फीट की प्रतिमा में दिखता है शिव-शक्ति का अद्भुत संगम
पटना के पास गौरीचक क्षेत्र के चंदासी गांव में बना अर्धनारीश्वर मंदिर इन दिनों अपनी भव्यता और अनूठी आध्यात्मिक पहचान के लिए आकर्षण का केंद्र है. मंदिर परिसर में भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप अर्धनारीश्वर की 108 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा स्थापित की गयी है. यह प्रतिमा शिव और शक्ति के अद्वैत स्वरूप तथा नर-नारी की ऊर्जा के संतुलन का प्रतीक मानी जाती है. इस भव्य आध्यात्मिक परियोजना के निर्माण की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी. निर्माण के दौरान ही विशाल प्रतिमा और इसकी आकर्षक शिल्पकला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गयी थी. 26 जून 2026 को महायज्ञ और कलश यात्रा के साथ प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई. पटना-गया मार्ग पर जीरो माइल के समीप स्थित यह धाम श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का नया केंद्र बन रहा है.

खाजपुरा शिव मंदिर की भव्यता और परिसर में श्रद्धालुओं की आस्था
खाजपुरा शिव मंदिर: आस्था के साथ सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल
पटना के बेली रोड स्थित खाजपुरा शिव मंदिर पटना की धार्मिक और सामाजिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है. करीब सवा एकड़ में फैला यह मंदिर अपनी भव्यता और आस्था के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर के निर्माण से जुड़ी कहानी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करती है. खाजपुरा के तत्कालीन जमींदार बदरुल हसन साहब ने वर्ष 1920 में मंदिर और मस्जिद दोनों के लिए जमीन दान की थी. आज उनके मजार से करीब 500 मीटर की दूरी पर मस्जिद और लगभग 500 मीटर की दूरी पर शिव मंदिर स्थित है. एक ही इलाके में दोनों धार्मिक स्थलों की मौजूदगी वर्षों से आपसी भाईचारे और सद्भाव का संदेश देती है. खाजपुरा शिव मंदिर की यह कहानी पटना की गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक एकता की खूबसूरत तस्वीर पेश करती है. 1935 में खाजपुरा शिव मंदिर की स्थापना की गयी थी, जिसे खाजपुरा के ग्रामीण लोगों ने बनवाया था. इसका वर्तमान स्वरूप 1997 का है. गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है और प्रथम में मां दुर्गा, मां अन्नपूर्णा, हनुमान जी सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्ति हैं. दूसरे तल पर राम दरबार है. इलाके का सबसे पुराना और भव्य शिव मंदिर होने के कारण शिवभक्तों की भीड़ सबसे ज्यादा होती है. खासकर सावन माह यहां भक्तों का सैलाब उमड़ता है. यहां पर भगवान शिव पूरे परिवार के साथ मौजूद है.

बिहटा के महादेवा रोड स्थित अतिप्राचीन बाबा बिटेश्वरनाथ मंदिर, जहां विराजमान हैं पंचमुखी शिवलिंग
महाभारत काल का बिहटा के बाबा बिटेश्वरनाथ धाम की कहानी
बिहटा नगर के महादेवा रोड स्थित बाबा बिटेश्वरनाथ मंदिर आस्था और प्राचीन इतिहास का अनूठा संगम है. मंदिर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग को लेकर मान्यता है कि यह महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. स्थानीय लोगों के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने राजा विराट की नगरी में इस शिवलिंग की स्थापना की थी. करीब ढाई सौ वर्ष पहले फ्रांसीसी दार्शनिक डॉ. बुकानन ने भी अपनी किताब में इस प्राचीन मंदिर का उल्लेख किया था. उनके विवरण में सोन नदी के तट पर चतुर्मुखी शिवलिंग के स्थापित होने की बात कही गयी है. मान्यता है कि समय के साथ सोन नदी में भराव होने से मंदिर का बड़ा हिस्सा जमीन में समा गया. श्रावण माह और गुरु पूर्णिमा के अवसर पर यहां लाखों श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

बैकटपुर के श्री गौरीशंकर बैकुंठनाथ धाम में विराजमान अद्भुत शिवलिंग
एक शिवलिंग में विराजमान 1200 रुद्र, बैकटपुर के गौरीशंकर बैकुंठनाथ धाम की अद्भुत महिमा
राजधानी पटना से करीब 31 किलोमीटर पूर्व खुसरूपुर के बैकटपुर में स्थित श्री गौरीशंकर बैकुंठनाथ धाम अपनी अनूठी धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. यहां शिवलिंग स्वरूप भगवान शिव के साथ माता पार्वती भी विराजमान हैं. मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर कुल 12 धारियां बनी हैं और प्रत्येक धारी में छोटे-छोटे 100 शिवलिंग अंकित हैं. इस तरह पूरे शिवलिंग पर कुल 1200 छोटे शिवलिंग मौजूद हैं, जिन्हें रुद्र कहा जाता है. मान्यता है कि इस तरह का अद्भुत शिवलिंग दुनिया में कहीं और नहीं है. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार गंगा किनारे बसा यह क्षेत्र कभी बैकुंठ वन के नाम से जाना जाता था. आनंद रामायण में भी इस स्थान का उल्लेख बैकुंठा के रूप में मिलता है. यही वजह है कि बैकुंठनाथ धाम आस्था के साथ-साथ पौराणिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है.

गायघाट के 522 वर्ष से अधिक पुराने गौरीशंकर मंदिर में सावन के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के दर्शन को उमड़ते श्रद्धालु
522 साल पुराना गौरीशंकर मंदिर, जहां सावन में उमड़ता है आस्था का सैलाब
पटना के गायघाट स्थित ऐतिहासिक गौरीशंकर मंदिर की पहचान 522 वर्ष से भी अधिक पुराने शिवधाम के रूप में है. अशोक राजपथ पर महात्मा गांधी सेतु से पूर्व दिशा में स्थित यह मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला और धार्मिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है. यहां भगवान गौरीशंकर के साथ माता पार्वती भी विराजमान हैं. मान्यता है कि भगवान गौरीशंकर के दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. सावन माह में मंदिर में रुद्राभिषेक, भागवत कथा और रामकथा जैसे धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते हैं. शिवरात्रि के अवसर पर यहां शिव विवाह का विशेष आयोजन किया जाता है. सोमवारी और पूर्णिमा की शाम भगवान गौरीशंकर का विशेष श्रृंगार किया जाता है. सालभर श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, लेकिन सावन में मंदिर परिसर में भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है.

कंकड़बाग स्थित पंच शिव मंदिर में सावन के दौरान भगवान शिव का जलाभिषेक करते श्रद्धालु
कंकड़बाग का पंच शिव मंदिर, जहां सावन में भोर से ही गूंजता है हर-हर महादेव
कंकड़बाग स्थित पंच शिव मंदिर इलाके के प्रमुख और आस्था के बड़े केंद्रों में शामिल है. सावन के महीने में यहां भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगती है. भक्तों की सुविधा को देखते हुए मंदिर का द्वार सुबह चार बजे से ही खोल दिया जाता है. सुबह की पहली किरण के साथ ही शिवभक्त पूजा की सामग्री लेकर मंदिर पहुंचने लगते हैं. श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर फूल, बेलपत्र और प्रसाद अर्पित करते हैं. मंदिर में भगवान शिव का विशेष शृंगार किया जाता है, जिसे देखने के लिए भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं. सावन के दौरान मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से भक्तिमय बना रहता है.
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By विवेक सिंह
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उन्होंने मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई की है. शिक्षा के दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, जनसंचार, फोटो जर्नलिज्म, मोबाइल जर्नलिज्म (MOJO) और मीडिया रिसर्च की गहन समझ विकसित की है. अध्ययन के दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की, जहां उन्हें न्यूजरूम की कार्यप्रणाली, टीवी समाचार निर्माण, स्क्रिप्ट लेखन, विजुअल चयन, फील्ड रिपोर्टिग और प्रसारण प्रक्रिया को नजदीक से समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ.
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