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Patna Science City: विज्ञान की दुनिया का नया केंद्र डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी, एग्जीबिट देख होगा अनूठा अनुभव

Updated at : 22 Sep 2025 11:14 AM (IST)
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patna science city

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Patna Science City: राजधानी में 889 करोड़ की लागत से बनी डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया. 21 एकड़ में फैला यह केंद्र छात्रों के लिए विज्ञान को सरल और मनोरंजक बनाएगा.

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Patna Science City: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को पटना के राजेंद्र नगर में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी का उद्घाटन किया. साथ ही कहा कि यह देश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को जानने-समझने के लिये आकर्षक और अनूठा केंद्र होगा. यहां आने वाले छात्र-छात्राओं को विज्ञान की मूलभूत बातें, गतिविधियों और विज्ञान के सिद्धांतों को सरलता से समझने में सुविधा होगी और विज्ञान में उनकी रुचि बढ़ेगी. इसका उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री ने इसके विभिन्न भागों का निरीक्षण किया. इस दौरान वे पूरे परिसर और प्रथम तल पर गये और वहां विभिन्न गैलरियों, वैज्ञानिक प्रदर्शों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया. कार्यक्रम में वहां उपस्थित बच्चों ने ताली बजाकर मुख्यमंत्री का जोरदार स्वागत किया. मुख्यमंत्री ने भी बच्चों का अभिवादन स्वीकार किया. इस दौरान भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने मुख्यमंत्री को डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी के निर्माण से संबंधित विस्तृत जानकारी दी.

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी बहुत अच्छा बना है. इसके निर्माण कार्य को हमने कई बार देखा है. लंदन में अधिकारियों के साथ जाकर हमने वहां के साइंस सिटी का भी निरीक्षण किया था. इसके निर्माण को लेकर कई विशेषज्ञों की राय ली गयी है. इस साइंस सिटी को विशिष्ट आइडियाज के साथ बनाया गया है. यह साइंस सिटी विज्ञान और नवाचार का एक ऐसा आधुनिक केन्द्र बना है जो सभी आयु वर्ग के लोगों को आकर्षित करेगा. डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी विज्ञान के प्रचार-प्रसार के विश्व के बेहतरीन केंद्रों में से अपने आप में विशिष्ट होगा. हमलोगों ने इस साइंस सिटी का नामकरण महान वैज्ञानिक एवं पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर किया है. डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का बिहार के प्रति विशेष लगाव था. हमारे मन में भी उनके प्रति विशेष श्रद्धा थी और हमारे प्रति भी वे स्नेह रखते थे.

एक मार्च 2019 को मुख्यमंत्री ने किया था शिलान्यास

इस परियोजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक मार्च 2019 को किया था. मुख्यमंत्री ने कई बार परियोजना का स्थल निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिया. साथ ही अच्छे स्तर का साइंस सिटी बनाने के लिए अधिकारियों की टीम को अध्ययन के लिए विदेश भेजा गया. बाद में मार्च, 2024 में मुख्यमंत्री ने स्वयं लंदन स्थित साइंस सिटी का निरीक्षण किया और नयी पीढ़ी के लोगों को विज्ञान के प्रति और भी आकर्षित करने के लिए बेहतर साइंस सिटी बनाने का निर्देश दिया. 21 एकड़ के भूखंड पर नवनिर्मित इस साइंस सिटी में विज्ञान आधारित पांच गैलरी, 269 रोचक विज्ञान प्रदर्श, ऑडिटोरियम, फोर डी थियेटर और छात्रों एवं शिक्षकों के लिये डोरमेट्री की सुविधा प्रमुख आकर्षण केंद्र हैं. विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा 889 करोड़ रुपये की लागत से इसके निर्माण की स्वीकृति दी गयी है. इसका निर्माण भवन निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा है.

विज्ञान की अद्भुत दुनिया का नया केंद्र

करीब 20.5 एकड़ भूमि पर बनी इस भव्य साइंस सिटी को महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ कलाम की स्मृति में तैयार किया गया है. यहां फिलहाल दो गैलरियां-बी ए साइंटिस्ट्स गैलरी और बेसिक साइंस गैलरी-आगंतुकों के लिए खोली जायेगी. अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित इन प्रदर्शों में विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को सरल और रोचक ढंग से समझाया गया है. आने वाले समय में पांचों गैलरियां, 4डी थियेटर और डोरमेटरी सहित यह स्थल विज्ञान व नवाचार का बड़ा केंद्र बनेगा. पांचों गैलरियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 7725 वर्गमीटर है में 26 थीम पर आधारित 269 विज्ञान प्रदर्श स्थापित किया जाना है.

प्रदर्शों का अधिष्ठापन नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम (एनसीएसएम) के द्वारा क्रिएटिव म्यूजियम डिजाइनर्स (सीएमडी) के माध्यम से किया जा रहा है. तीन अन्य गैलरियों में प्रदर्श अधिष्ठापन हेतु एनसीएसएम के साथ एमओयू की जा रही है. साथ ही, भूतल पर 4डी थियेटर, प्री फंक्शनल हॉल, बहुउद्देशीय हॉल की भी सुविधा उपलब्ध रहेगी. यह साइंस सिटी विज्ञान और नवाचार का एक अनूठा केंद्र बनेगी, जो विद्यार्थियों सहित सभी आयु वर्ग के लोगों को आकर्षित करें.

ये हैं पांच गैलरी

– बी ए साइंटिस्ट्स गैलरी
– बेसिक साइंस गैलरी
– सस्टेनेबल प्लैनेट गैलरी
– स्पेस एंड एस्ट्रोनोमी गैलरी
– बॉडी एंड माइंड गैलरी

डॉ कलाम के साथ आगंतुक ले सकेंगे सेल्फी

साइंस सिटी के ग्राउंड फ्लोर में प्रवेश करते ही सामने एक खूबसूरत सेल्फी प्वाइंट बनाया गया है. यहां डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की मूर्ति लगायी गयी है. इसके अलावे इस एट्रियम एरिया में डिजिटल पैनल व म्यूरल लगाए गए हैं. इसके अलावे सामने सभी गैलरी की जानकारी के लिए फ्लेक्स बोर्ड लगाया गया है. यह इस एरिया आकर्षक भी बनाया है.

ऑडिटोरियम में थ्री डी विज्ञान फिल्म दिखाने की रहेगी व्यवस्था

ग्राउंड फ्लोर पर ऑडिटोरियम को तैयार किया गया है. यहां बड़ीस्क्रीन भी लगी है. इसमें बच्चों व आगंतुकों को थ्री डी विज्ञान फिल्म दिखाने की व्यवस्था रहेगी. इसमें 476 सीट लगायीहै. इसके अलावे साइंस सिटी में बच्चों एवं आगंतुकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कैफेटेरिया, पेयजल, शौचालय, वाहन पार्किंग सहित अन्य आवश्यक कार्यों को पूरा किया गया है. परिसर में पौधारोपण का कार्य भी चल रहा है. जिससे यह और भी अधिक सुंदर लगे.

150 छात्रों व तीन शिक्षकों के लिए डोरमेटरी तैयार

साइंस सिटी में अंतिम गैलरी की ओर 150 छात्रों व तीन शिक्षकों के लिए डोरमेटरी तैयार कर लिया गया है. प्रति कमरे में 24 बेड को लगाया गया है. इसके अलावे डोरमेटरी में शैक्षणिक परिभ्रमण के लिए आने वाले बच्चों के रहने एवं खाने की व्यवस्था रहेगी. इससे बिहार के बाहर से आने वाले छात्रों को काफी सुविधा मिलेगी. इस साइंस सिटी का उद्देश्य आगंतुकों को उनके आसपास की दुनिया में विज्ञान के कार्य करने के तरीकों की खोज करके प्रेरित, सशक्त और शिक्षित करना है.

दो गैलरी में लगे प्रमुख प्रदर्श

साइंस सिटी में दर्शकों के लिए कई नए और आकर्षक प्रदर्श लगाए गए हैं, जो विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को सरल और मनोरंजक तरीके से समझाते हैं. ये प्रदर्श बच्चों और बड़ों में वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा देने का एक बेहतरीन माध्यम हैं. फिलहाल दो गैलरी में प्रदर्श को लगाया गया है. बी ए साइंटिस्ट्स गैलरी में हार्मोनिक स्ट्रिंग्स, 3डी जोइट्रोप, रिपल टैंक, स्टैंडिंग वेव्स, क्योरोसिटी, लेविटेटिंग वाटर जैसे रोचक विज्ञान प्रदर्श लगाए गए हैं. वहीं, बेसिक साइंस गैलरी में डेसिमल सिस्टम, बाइनरी सिस्टम, गोल्डेन रेशियो, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिसिस जैसे आधुनिक विषयों पर आधारित प्रदर्श शामिल हैं.

जोएट्रोप: साइंस सिटी में 3डीजोएट्रोपप्रदर्श दर्शकों को प्राचीन भारतीय सम्राट अशोक की कहानी सुनाता है. यह प्रदर्श‘दृष्टिनिर्बन्ध’ के वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार स्थिर छवियों का एक क्रम जब तेजी से घूमता है, तो यह लगातार गतिमान दृश्य का भ्रम पैदा करता है. इस प्रदर्श में, 3डी मॉडल्स की एक श्रृंखला पर स्ट्रोब लाइट की मदद से ””अशोक द फियर्स”” से ””अशोक द राइटियस”” में उनके परिवर्तन की अविस्मरणीय कहानी को जीवंत किया गया है.

आश्चर्य और विस्मय: यह प्रदर्श इस बात पर जोर देता है कि विज्ञान में आश्चर्य और विस्मय की भावना कितनी महत्वपूर्ण है. यह बताता है कि इन्हीं भावनाओं ने मनुष्यों को प्राकृतिक दुनिया की खोज करने और उसे समझने के लिए प्रेरित किया है. पूरे इतिहास में, विस्मय और जिज्ञासा ने ही वैज्ञानिकों को अभूतपूर्व खोजें करने के लिए प्रेरित किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वैज्ञानिक प्रगति की बुनियाद में जिज्ञासा ही सबसे बड़ा प्रेरक है.

तापमान का दृश्यांकन: तापमान का दृश्यांकनप्रदर्शअवरक्त (इन्फ्रारेड) ऊर्जा और हीट मैप्स के बारे में जानकारी देता है. इसमें बताया गया है कि मनुष्य सहित सभी वस्तुएं एक अदृश्य हीट सिग्नेचर उत्सर्जित करती हैं, जिसे अवरक्त(आइआर) कैमरे द्वारा पकड़ा जा सकता है. यह प्रदर्श आगंतुकों के शरीर के ताप संकेतों को इकट्ठा करके उनका हीट मैप बनाता है, जिसमें गर्म क्षेत्रों को लाल और ठंडे क्षेत्रों को नीले जैसे रंगों से दर्शाया गया है. यह विज्ञान को बेहद सरल और समझने योग्य बनाता है.

गणित की सरल समझ: यह प्रदर्श समानुपात की गणितीय अवधारणा को समझाता है. यह बताता है कि समानुपात दो संख्याओं के बीच एक गणितीय तुलना है.प्रदर्श में प्रत्यक्ष और व्युत्क्रम समानुपात के बीच के अंतर को स्पष्ट किया गया है, जहां प्रत्यक्ष समानुपात में एक राशि के बढ़ने पर दूसरी राशि भी बढ़ती है, जबकि व्युत्क्रम में एक के बढ़ने पर दूसरी कम होती है. यह गणित के इस महत्वपूर्ण सिद्धांत को समझने का एक आसान तरीका है.

टोपोलॉजी: टोपोलॉजीप्रदर्श ज्यामिति की उस शाखा से परिचित कराता है जो आकृतियों और सतहों के गुणों का अध्ययन करती है, जो उनके विकृत होने पर भी अपरिवर्तित रहते हैं.मोबियस पट्टी और क्लेन बोतल जैसी आकृतियां यह दर्शाती हैं कि कैसे एक सतह का केवल एक ही पहलू और एक ही किनारा हो सकता है.प्रदर्श में होबरमैन गोला भी शामिल है, जो यह दिखाता है कि कैसे जटिल आकृतियां अपना आकार बदल सकती हैं, लेकिन अपने मूल गुणों को बनाए रखती हैं.

प्लेटोनिक सॉलिड्स (ब्रह्मांड का प्राचीन रहस्य): यह प्रदर्श प्राचीन गणितीय और दार्शनिक अवधारणा ‘प्लेटोनिकसॉलिड्स’ पर आधारित है. इसमें पांच सम उत्तलबहुफलकों जिसमें टेट्राहेड्रोन, क्यूब, ऑक्टाहेड्रोन, डोडेकाहेड्रोन और इकोसाहेड्रोन को दिखाया गया है. यह प्रदर्श इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे महान दार्शनिक प्लेटो ने इन आकारों को क्रमशः अग्नि, पृथ्वी, वायु, जल और स्वर्ग जैसे ब्रह्मांड के मूल तत्वों से जोड़ाथा.

गोल्डन रेशियो: इस प्रदर्श में गोल्डन रेशियो की उत्पत्ति और महत्व के बारे में एक वीडियो दिखाया गया है. इसके साथ ही, एक इंटरैक्टिव गेम भी है, जिसमें प्रसिद्ध मूर्तियों, चित्रों और वास्तुकला की 30 तस्वीरों में गोल्डन रेशियो को पहचानने की चुनौती दी जाती है. यह प्रदर्श गणित और कला के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है और आगंतुकों को सुंदरता के पीछे के गणित को समझने का मौका देता है.

दानेदार पदार्थों का व्यवहार: यह प्रदर्श दो पारदर्शी कक्षों में रखे दानेदार पदार्थों के व्यवहार को दर्शाता है.कक्षों को उल्टा करने पर यह दिखाया जाता है कि कैसे विभिन्न पदार्थ अलग-अलग ढलान बनाते हैं. यह प्रदर्श यह समझने में मदद करता है कि दानेदार पदार्थों का ‘विश्रामकोण’ क्या होता है और यह उनके जमा होने के तरीके को कैसे प्रभावित करता है.

दशमलव प्रणाली: दशमलव प्रणाली प्रदर्श संख्या प्रणालियों के विकास की कहानी सुनाता है. यह प्रागैतिहासिक गणना से लेकर बेबीलोनियाई और माया सभ्यताओं की प्रणालियों तक की यात्रा को दर्शाता है.प्रदर्श में ‘0’ के महत्व पर भी जोर दिया गया है, जिसने दशमलव प्रणाली को एक उत्कृष्ट और व्यावहारिक आविष्कार बनाया. यह बताता है कि कैसे हमारी 10 उंगलियों ने इस प्रणाली के विकास में अहम भूमिका निभाई.

जल में तरंगें: यह प्रदर्श जल में तरंगों के व्यवहार को समझाता है. इसमें दिखाया गया है कि जब स्थिर जल में दो विक्षोभ एक साथ उत्पन्न होते हैं तो वे कैसे आपस में हस्तक्षेप करते हैं. यह रचनात्मक हस्तक्षेप से बड़ी लहरें बनाने और विनाशकारी हस्तक्षेप से एक-दूसरे को बेअसर करने की प्रक्रिया को दिखाता है. यह प्रदर्श ध्वनि और प्रकाश तरंगों जैसे जटिल सिद्धांतों को समझने का आधार भी प्रदान करता है.

आभासी रिपल टैंक: आभासी रिपल टैंक एक इंटरैक्टिवप्रदर्श है, जहां फर्श पर एक डिजिटल तालाब बनाया गया है. आगंतुक इस पर अपने पैरों की हलचल से अपनी खुद की गोलाकार तरंगें उत्पन्न कर सकते हैं. यह प्रदर्श यह दिखाता है कि जब दो तरंगें आपस में मिलती हैं, तो कैसे ‘नोडल’ और एंटी-नोडल रेखाओं के साथ एक विशिष्ट पैटर्न बनता है.

वैज्ञानिक समुदाय में शामिल हों: वैज्ञानिक समुदाय में शामिल हों प्रदर्श एक मजेदार और प्रेरक अनुभव प्रदान करता है. जब आगंतुक पदचिन्हों पर खड़े होते हैं, तो एक छिपा हुआ कैमरा उनके चेहरे की छवि लेता है. यह छवि सामने की दीवार पर दिखाई देने वाले वैज्ञानिकों के एनिमेटेड मोजेक में शामिल हो जाती है, जिससे आगंतुक भी इस महान वैज्ञानिक समुदाय का हिस्सा बन जाते हैं.

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हिमांशु देव

लेखक के बारे में

By हिमांशु देव

सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

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