बिहार में बन रहा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल, इलाज के लिए होंगे 5462 बेड, हेलीपैड की होगी व्यवस्था

Edited by Paritosh Shahi
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Patna PMCH: कभी बदहाली का शिकार रहा पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल बनने जा रहा है. 5462 बेड की क्षमता वाला यह अस्पताल आधुनिक चिकित्सा तकनीक से लैस होगा और देश के किसी भी कोने से आने वाले मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज देगा.

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Patna PMCH: बिहार के लोगों को पहले जहां बीमारियों के इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था. वहीं, अब पटना में AIIMS, आईजीआईएमएस और पीएमसीएच जैसे बड़े अस्पताल बन चुके हैं. बिहार का 100 साल पुराना अस्पताल PMCH जो कभी सरकारी उपेक्षा का शिकार था. अब दुनिया के दूसरे सबसे बड़े अस्पताल के रूप में पहचाना जाएगा. इसका निर्माण पूरा होने के बाद दूसरे राज्‍यों के लोग यहां इलाज के लिए आएंगे. PMCH में मरीजों के इलाज के लिए 5462 बेड उपल्बध होंगे. यह अस्पताल अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा.

आस पास के राज्‍यों को मिलेगी एयर एंबुलेंस की सुविधा

बिहार के स्वास्थ्य सेवा में ये क्रांतिकारी बदलाव सीएम नीतीश कुमार के कार्यकाल में हुआ है. PMCH में हैलीपैड के बनकर तैयार होने के बाद बिहार के मरीजों को मिलने वाली स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा और भी हाई टेक होगी. इसका लाभ दूसरे राज्‍य के मरीजों को भी मिल सकेगा. जिससे आस पास के राज्‍यों के मरीजों को भी लाभ मिलेगा. मरीज एयर एम्बुलेंस के जरिए सीधे अस्पताल तक पहुंच सकेंगे.

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बिहार बनेगा ग्लोबल मेडिकल आइकन

2005 में जहां बिहार के स्वास्थ्य विभाग का बजट 105.70 करोड़ रुपये था. वहीं अब 2025 में यह बढ़कर 2003580 करोड़ रुपये हो गया है. इसका परिणाम ये है कि अपनी पहचान खो चुका पीएमसीएच एक बार फिर से अपनी ग्‍लोबल पहचान हासिल करेगा और ग्लोबल मेडिकल आइकन बनकर उभरेगा.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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