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Patna News: गांधी मैदान में ट्रेनिंग कैंप पर रोक, मॉर्निंग वॉक और दौड़ पर नहीं, जिला प्रशासन ने किया साफ

Updated at : 21 Dec 2025 12:13 PM (IST)
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Patna News: गांधी मैदान में ट्रेनिंग कैंप पर रोक, मॉर्निंग वॉक और दौड़ पर नहीं, जिला प्रशासन ने किया साफ

Gandhi Maidan

Patna News: पटना के गांधी मैदान को लेकर फैली अफवाहों पर जिला प्रशासन ने विराम लगा दिया है. हाल के दिनों में यह चर्चा तेज थी कि गांधी मैदान में आम लोगों की दौड़-टहल पर भी रोक लगा दी गई है. लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गांधी मैदान में स्वास्थ्य लाभ के लिए आने वाले लोगों पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है. रोक केवल कोचिंग संस्थानों और संगठनों द्वारा लगाए जा रहे ट्रेनिंग कैंप पर लगाई गई है, जिन्हें अब मैदान से हटा दिया गया है.

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Patna News:: बिहार की राजधानी पटना के फेफड़े कहे जाने वाले गांधी मैदान को लेकर जिला प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है. मैदान में बेतहाशा बढ़ती भीड़ और आम लोगों को होने वाली असुविधा को देखते हुए अब यहां चलने वाले तमाम निजी ट्रेनिंग कैंप्स और कोचिंग संस्थानों के शारीरिक अभ्यास पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है.

जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी व्यक्तिगत पाबंदी के लिए नहीं, बल्कि मैदान की व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए उठाया गया है. अब गांधी मैदान के बजाय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा दीघा और कलेक्ट्रेट घाट के किनारे पसीना बहाते नजर आएंगे.

ट्रेनिंग कैंप की बढ़ती संख्या बनी परेशानी

गांधी मैदान में प्रतियोगी परीक्षाओं और खेल प्रशिक्षण के नाम पर चलने वाले ट्रेनिंग कैंप की संख्या लगातार बढ़ रही थी. पहले जहां ऐसे कैंप केवल 14 संस्थानों द्वारा लगाए जाते थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर करीब 60 तक पहुंच गई थी.

सुबह और शाम के समय बड़ी संख्या में छात्रों और प्रशिक्षुओं के एक साथ अभ्यास करने से मैदान में अत्यधिक भीड़ हो रही थी. इससे मॉर्निंग वॉक और सामान्य दौड़ के लिए आने वाले लोगों को काफी असुविधा हो रही थी.

शिकायतों के बाद लिया गया फैसला

जिला प्रशासन के अनुसार, इस समस्या को लेकर कई नागरिकों और संस्थाओं ने लिखित शिकायतें दर्ज कराई थीं. शिकायतों में कहा गया था कि ट्रेनिंग कैंप के कारण गांधी मैदान में चलना-फिरना मुश्किल हो गया है और आम लोगों के लिए मैदान का उपयोग सीमित होता जा रहा है. इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जनहित में ट्रेनिंग कैंप को गांधी मैदान से हटाने का निर्णय लिया.

प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि गांधी मैदान में सुबह और शाम की सैर, व्यक्तिगत दौड़ और टहलने पर कोई रोक नहीं लगाई गई है. स्वास्थ्य के लिए आने वाले लोग पहले की तरह मैदान का उपयोग कर सकेंगे. प्रशासन का कहना है कि यह फैसला सिर्फ भीड़ नियंत्रित करने और आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है, न कि लोगों को मैदान से दूर रखने के लिए.

दीघा घाट और कलेक्ट्रेट घाट पर शिफ्ट हुए कैंप

गांधी मैदान से हटाए गए ट्रेनिंग कैंप को दीघा घाट और कलेक्ट्रेट घाट पर शिफ्ट कर दिया गया है. वहां कोचिंग संस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को शारीरिक अभ्यास और प्रशिक्षण दे रहे हैं. प्रशासन का मानना है कि इन घाटों पर पर्याप्त जगह उपलब्ध है, जिससे ट्रेनिंग भी जारी रह सकेगी और गांधी मैदान में भीड़ का दबाव भी कम होगा.

गांधी मैदान पटना के लोगों के लिए सिर्फ एक मैदान नहीं, बल्कि खुली हवा में समय बिताने और स्वास्थ्य सुधारने का प्रमुख केंद्र है. प्रशासन का कहना है कि इसका मूल उद्देश्य आम लोगों के लिए खुला सार्वजनिक स्थान बनाए रखना है. इसी सोच के तहत ट्रेनिंग कैंप को दूसरे स्थानों पर शिफ्ट किया गया है, ताकि मैदान का संतुलित और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके.

आगे भी जारी रहेगी निगरानी

जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि गांधी मैदान में आगे भी निगरानी रखी जाएगी, ताकि दोबारा अनधिकृत ट्रेनिंग कैंप न लग सकें. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन का कहना है कि आम लोगों की सुविधा और सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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