पांच सीटों के लिए घमासान, एनडीए के पास बहुमत, मगर पांचवीं सीट पर एआईएमआईएम ने फंसाया पेंच
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 19 Feb 2026 3:33 PM
एआईएमआईएम प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान
Rajya Sabha Election: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के चुनाव से पहले सियासत गरमा गई है. एआईएमआईएम ने साफ कर दिया है कि वह किसी गठबंधन को समर्थन नहीं देगी, बल्कि खुद का उम्मीदवार उतारेगी. इससे एनडीए और महागठबंधन दोनों तरफ की चिंता बढ़ गई है.
Rajya Sabha Election: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव होने वाला है. एनडीए और महागठबंधन दोनों अपने-अपने हिसाब से जोड़-घटाव में लगे हैं. इसी बीच एआईएमआईएम ने खेल और रोचक बना दिया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी किसी को समर्थन नहीं देगी, बल्कि खुद का उम्मीदवार उतारेगी.
क्या बोले ईमान
अख्तरुल ईमान ने कहा कि हर बार उनसे यह क्यों पूछा जाता है कि वे किसे समर्थन देंगे. उन्होंने सवाल उठाया कि कोई यह क्यों नहीं पूछता कि उन्हें कौन समर्थन देगा. उनका कहना है कि राज्यसभा में कई दलों के सांसद हैं, लेकिन एआईएमआईएम का कोई प्रतिनिधि नहीं है. ऐसे में पार्टी अब अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है.
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग मौजूदा सरकार की नीतियों के खिलाफ हैं और दलितों व पिछड़ों की आवाज मजबूत करना चाहते हैं, उन्हें एआईएमआईएम का साथ देना चाहिए. उनका इशारा साफ था कि पार्टी अब सिर्फ समर्थन देने वाली भूमिका में नहीं रहना चाहती.
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क्या है गणित
अब जरा विधानसभा का गणित समझ लेते हैं. बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है. एनडीए के पास फिलहाल 202 विधायक हैं. इस हिसाब से वह आसानी से चार सीटें जीत सकता है. चार सीटों के बाद भी उसके पास कुछ वोट बचेंगे, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे दूसरे दलों या निर्दलीय विधायकों का सहारा लेना पड़ सकता है.
दूसरी तरफ महागठबंधन के पास करीब 35 विधायक हैं. यानी उसे एक सीट जीतने के लिए भी अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा. ऐसे में एआईएमआईएम के पांच विधायक और बसपा का एक विधायक काफी अहम हो जाते हैं. ये विधायक फिलहाल किसी गठबंधन में नहीं हैं, इसलिए इनका रुख चुनाव का नतीजा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. अब देखना है कि पांचवीं सीट पर किसका पलड़ा भारी पड़ता है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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