एम्स पटना में अत्याधुनिक एआरटी सेंटर शुरू, बिहार के एचआईवी मरीजों को एक ही छत के नीचे मिलेगा समग्र इलाज

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एम्स पटना में एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी सेंटर का हुआ उद्धाटन

एम्स पटना में अत्याधुनिक एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) सेंटर शुरू हुआ है, जिससे बिहार के एचआईवी मरीजों को एक ही जगह निःशुल्क दवा, जांच, काउंसलिंग और फॉलोअप मिलेगा. इससे राज्य में कुल 35 ART सेंटर हो गए हैं. यह पहल इलाज, जागरूकता और मरीजों की जीवन गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगी.

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Patna News: (अजीत कुमार की रिपोर्ट) बिहार में एचआईवी संक्रमित मरीजों के इलाज और देखभाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एम्स पटना में अत्याधुनिक एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) सेंटर की शुरुआत की गई. इस पहल से राज्य के मरीजों को अब बेहतर, नियमित और समग्र उपचार सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी.

उद्घाटन समारोह

इस नए एआरटी सेंटर का उद्घाटन बिहार स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के परियोजना निदेशक (आईएएस) सुमित कुमार और एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सक, फैकल्टी सदस्य, स्वास्थ्यकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे.

राज्य में बढ़ी एआरटी सेंटर की संख्या

इस सेंटर के शुरू होने के बाद बिहार में कुल 35 एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी सेंटर संचालित हो गए हैं. अधिकारियों के अनुसार यह सुविधा केवल पटना ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों के लिए भी बड़ी राहत साबित होगी.

मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं

नए सेंटर में मरीजों को निम्न सुविधाएं एक ही जगह पर उपलब्ध होंगी:

  • निःशुल्क एंटीरेट्रोवायरल दवाएं
  • नियमित जांच और लैब सुविधाएं
  • काउंसलिंग सेवाएं
  • संक्रमण प्रबंधन
  • दीर्घकालिक फॉलोअप और मॉनिटरिंग

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

बिहार स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के परियोजना निदेशक सुमित कुमार ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता एचआईवी मरीजों को सम्मानजनक और भेदभाव रहित स्वास्थ्य सेवा देना है. वहीं एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि एचआईवी को सामाजिक कलंक नहीं बल्कि एक सामान्य चिकित्सीय स्थिति के रूप में देखा जाना चाहिए, ताकि मरीज बिना डर के इलाज करा सकें.

विशेषज्ञों की राय

एआरटी सेंटर के नोडल पदाधिकारी प्रो. (डॉ.) ज्योति प्रकाश ने बताया कि यह केंद्र मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग, समय पर इलाज और जीवन गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा.

विशेषज्ञों ने कहा कि एचआईवी के खिलाफ लड़ाई केवल चिकित्सा संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज, स्वास्थ्य संस्थानों और सरकारी एजेंसियों की साझा भागीदारी जरूरी है. जागरूकता और संवेदनशीलता इस बीमारी से लड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है.

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निखिल अनुराग

लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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