हृदय रोग के इलाज में नई तकनीक की एंट्री, अब बिना स्टेंट भी खुल सकेगी ब्लॉकेज नसें
Published by : Karuna Tiwari Updated At : 14 Jun 2026 1:14 PM
बिहार इंटरवेंशनल काउंसिल 2026 कांफ्रेंस
Patna Health News: हृदय रोग के इलाज में नई तकनीकों के आने से मरीजों को बड़ी राहत मिलने वाली है. अब हृदय की कुछ नसों में होने वाले ब्लॉकेज को बिना स्टेंट लगाए भी खोला जा सकेगा. पटना में आयोजित बिहार इंटरवेंशनल काउंसिल 2026 कॉन्फ्रेंस में देशभर से आए हृदय रोग विशेषज्ञों ने आधुनिक इलाज की कई नई तकनीकों की जानकारी दी.
Patna News: (आनंद तिवारी की रिपोर्ट)
पटना के गांधी मैदान स्थित एक होटल में आयोजित बिहार इंटरवेंशनल काउंसिल 2026 कॉन्फ्रेंस में हृदय रोगों के इलाज से जुड़ी नई तकनीकों पर चर्चा की गई. कार्यक्रम का उद्घाटन वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस चटर्जी, डॉ. संजीव कुमार और आईजीआईसी के डॉ. संदीप कुमार सहित अन्य चिकित्सकों ने किया.
बिना स्टेंट ब्लॉकेज खोलने की नई तकनीक
कोच्चि से आए हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जबीर अब्दुल्लाह कुट्टी ने बताया कि हृदय की छोटी नसों में होने वाले ब्लॉकेज को अब बैलून तकनीक के माध्यम से खोला जा सकता है. इसके लिए हर मामले में स्टेंट लगाने की जरूरत नहीं होगी. यह प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में पूरी हो सकती है और मरीज के लिए अधिक सुविधाजनक मानी जा रही है.
अब बिना तार के लगेगा पेसमेकर
कोलकाता से आए डॉ. देवदत्ता भट्टाचार्य ने कॉर्डलेस यानी बिना तार वाले पेसमेकर की तकनीक पर जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस नई तकनीक से मरीजों की रिकवरी पहले की तुलना में अधिक तेजी से होती है और संक्रमण का खतरा भी कम रहता है.
चार-पांच ब्लॉकेज का इलाज भी हुआ आसान
आईजीआईसी के डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि पहले हृदय में चार या पांच ब्लॉकेज होने पर इलाज काफी जटिल माना जाता था. लेकिन आधुनिक तकनीकों की मदद से अब ऐसे मरीजों का इलाज भी अधिक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से संभव हो गया है.
नवजात शिशुओं के दिल की बीमारी का भी बेहतर इलाज
कोच्चि से आए डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि यदि किसी नवजात के दिल में छेद हो तो अब घबराने की जरूरत नहीं है. आधुनिक उपकरणों और तकनीकों की मदद से जन्म के एक महीने बाद ही सर्जरी की जा सकती है. इससे बच्चों का इलाज पहले से अधिक आसान और सुरक्षित हो गया है.
500 से अधिक चिकित्सक हुए शामिल
दो दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस में बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों से 500 से अधिक चिकित्सक भाग ले रहे हैं. पहले दिन करीब 40 विशेषज्ञों ने हृदय रोग, उपचार और नई तकनीकों पर अपने अनुभव और शोध साझा किए. विशेषज्ञों ने कहा कि इन नई तकनीकों को बिहार के अस्पतालों में भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि मरीजों को बेहतर और आधुनिक इलाज मिल सके.
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By Karuna Tiwari
करुणा तिवारी पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की. 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है. अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं.
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