Patna: इंजीनियर ने पूछताछ में उगले कई राज, फर्जी में 50 तो सामान्य काम में बांध रखा था 18 फीसदी कामिशन

भवन निर्माण विभाग के कार्य करने वाले ठेकेदारों के बीच संजीत कुमार की छवि सबसे अधिक कमीशन खाने वाले अधिकारी के रूप में है. प्राथमिकता सूची वाले काम में वह 50 फीसदी तक कमीशन लेता था. पूर्व में हुए काम की ही रीपेमेंट कर देता था. मरम्मत से जुड़े काम इसमें सबसे अधिक थे
अनुज शर्मा, पटना. भवन निर्माण विभाग के पटना सेंट्रल डिवीजन के कार्यपालक अभियंता संजीत कुमार के पटना आवास से बरामद एक करोड़ आठ लाख 72 हजार रुपये की रकम आला अधिकारियों की हिस्सेदारी थी. अपनी काली कमाई को वह पहले ही ठिकाने लगा चुका था. 12 घंटे से अधिक समय तक निगरानी की कस्टडी के दौरान उसने कई राज उगले हैं. निगरानी ब्यूरो को शक है कि जो पैसा वह निवेश नहीं कर पाया, वहीं बैग में रखे रह गये थे. विभाग में हाल ही में अधीक्षण अभियंता का पद रिक्त हुआ है. संजीत की भी संचिका प्रोन्नति के लिये गयी हुई है. वह प्रोन्नति पाकर साउथ बिहार सर्किल की कुर्सी हासिल करने की सेटिंग कर रहा था.
भवन निर्माण विभाग के कार्य करने वाले ठेकेदारों के बीच संजीत कुमार की छवि सबसे अधिक कमीशन खाने वाले अधिकारी के रूप में है. प्राथमिकता सूची वाले काम में वह 50 फीसदी तक कमीशन लेता था. पूर्व में हुए काम की ही रीपेमेंट कर देता था. मरम्मत से जुड़े काम इसमें सबसे अधिक थे. हर टेंडर पर 18 फीसद कमीशन बंधा था. ठेकेदार को निविदा खुलने से पहले यह रकम पहुंचानी होती थी. उच्च पदस्थाें तक पहुंच रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि ठेकेदार और इंजीनियर के बीच सामान्य रूप से निर्धारित आपसी तालमेल होता है. संजीत ने इस सीमा को पार कर दिया था. लालच इतना बढ़ गया था कि डमी ठेकेदार खड़े कर दिये थे.
एक खास नाम का ठेकेदार को हर उस जगह काम मिलता रहा, जहां कार्यपालक अभियंता संजीत कुमार की पोस्टिंग हुई. इस बार भी उक्त ठेकेदार को सेंट्रल डिवीजन से काम मिला है.
घूसखोर कार्यपालक अभियंता संजीत कुमार कई बड़ी परियोजनाओं से जुड़ा रहा है. 79 करोड़ की लागत से बन रहा बापू टॉवर, करोड़ों की लागत वाले आफिसर्स फ्लैट परियोजना के अलावा विधायक- एमएलसी के लिये आवास की परियोजना का कार्य भी इसकी निगरानी में ही हो रहा था. यह प्रोजेक्ट ही 250 करोड़ से अधिक का है.
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निगरानी की ईयर एंडिंग रिपोर्ट 2021 के अनुसार भवन निर्माण विभाग के 47 अधिकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति और घूसखोरी में पकड़े गये हैं. इनमें सबसे अधिक 19 कार्यपालक अभियंता हैं. इनमें छह कार्यपालक अभियंता बीरेंद्र नारायण शर्मा, सहरसा, कृष्णकांत कुमार किशनगंज, जीवेंद्र प्रसाद सिंह पटना, अमरेंद्र कुमार शिवहर, सुभाष कुमार गुप्ता नालंदा, राजेश कुमार, पटना घूसखोरी में रंगे हाथ दबोचे जा चुके हैं.
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