निर्जला एकादशी व्रत 17 जून को, श्रद्धालुओं पर बरसेगी श्री हरि की कृपा

Updated at : 10 Jun 2024 7:15 PM (IST)
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निर्जला एकादशी व्रत 17 जून को, श्रद्धालुओं पर बरसेगी श्री हरि की कृपा

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी 17 जून यानी सोमवार को चित्रा नक्षत्र व परिघ योग के साथ रवियोग व जयद् योग के सुयोग में निर्जला एकादशी व्रत मनाया जायेगा. वैष्णव एवं गृहस्थ दोनों की एकादशी इसी दिन मनेगी. पद्म पुराण के अनुसार इस एकादशी को निर्जला व्रत रखते हुए श्रीहरि विष्णु की पूजा करने से समस्त पापों से श्रद्धालु को मुक्ति मिलती है.

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लाइफ रिपोर्टर@पटना

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी 17 जून यानी सोमवार को चित्रा नक्षत्र व परिघ योग के साथ रवियोग व जयद् योग के सुयोग में निर्जला एकादशी व्रत मनाया जायेगा. वैष्णव एवं गृहस्थ दोनों की एकादशी इसी दिन मनेगी. पद्म पुराण के अनुसार इस एकादशी को निर्जला व्रत रखते हुए श्रीहरि विष्णु की पूजा करने से समस्त पापों से श्रद्धालु को मुक्ति मिलती है. एकादशी तिथि के महत्व को बताते हुए भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है- मैं वृक्षों में पीपल एवं तिथियों में एकादशी हूं. एकादशी की महिमा के विषय में शास्त्र सम्मत है कि विवेक के समान कोई बंधु नहीं और एकादशी के समान कोई व्रत नहीं. पांच ज्ञानेन्द्रियाँ, पांच कर्म इन्द्रियां और एक मन. इन ग्यारहों को जो साध ले, वह प्राणी एकादशी के समान पवित्र और दिव्य हो जाता है. निर्जला एकादशी के इस महान व्रत को देवता, दानव, नाग, यक्ष, गन्धर्व, किन्नर, नवग्रह आदि अपनी रक्षा और जगत के पालनहार श्री हरि की कृपा पाने के लिए करते है. झा ने पंचांगीय गणना के आधार पर बताया कि सामान्यतः पूरे वर्ष में कुल 24 एकादशी तथा अधिकमास में 26 एकादशी व्रत होते हैं. इसमें सिर्फ निर्जला एकादशी व्रत को करने से पूरे वर्ष में किये गये एकादशी के समान पुण्य मिलता है.

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पूजन का शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि : देर रात 04 :37 बजे तक

शुभ योग मुहूर्त : सुबह 08:25 बजे 10:08 बजे तक

अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:23 बजे से 12:18 बजे तक

चर-लाभ-अमृत मुहूर्त : दोपहर 01 :33 बजे से शाम 06:41 बजे तक

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