संवाददाता, पटना राज्य में सड़कों का निर्माण तय समय में गुणवत्तापूर्ण तरीके से करने के लिए पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है. अब परियोजनाओं के स्थल निरीक्षण की जियो टैगिंग के साथ फोटो और रिपोर्ट सीधे मुख्यालय को अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता भेजेंगे. इस रिपोर्ट की जांच कर मुख्यालय स्तर से सड़क परियोजनाओं में लापरवाही करने वाले ठेकेदारों और अभियंताओं की पहचान कर कार्रवाई की जायेगी. इस संबंध में पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग ने अपने-अपने विभागीय अभियंताओं को निर्देश जारी कर दिया है. इसका मकसद सड़क निर्माण में आने वाली समस्याओं को तुरंत दूर करना है. सूत्रों के अनुसार अब तक दोनों विभागों के सड़क निर्माण में शुरुआती स्तर पर प्रतिदिन निरीक्षण की जिम्मेदारी कनीय अभियंताओं को दी गयी थी. साथ ही निरीक्षण कर विभागीय एप पर जियो टैगिंग फोटो सहित प्रतिदिन प्रगति की रिपोर्ट अपलोड करने का निर्देश दिया गया था. इस रिपोर्ट के आधार सहित अन्य सूचनाओं की जानकारी मिलने पर निर्माणाधीन परियोजनाओं के कार्यपालक अभियंता को साप्ताहिक निरीक्षण का निर्देश दिया गया है. इसके साथ ही अधीक्षण अभियंता को प्रत्येक 15 दिनों पर यानी पाक्षिक और मुख्य अभियंता को मासिक निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है. मगध पथ अंचल के अधीक्षण अभियंता से स्पष्टीकरण : सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों समीक्षा के दौरान यह जानकारी मिली कि पथ निर्माण विभाग में मगध पथ अंचल के अधीक्षण अभियंता द्वारा सड़कों का निरीक्षण नहीं किया जा रहा है. ऐसे में काम के प्रति उदासीनता के कारण उनसे स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया है. इसके साथ ही लखीसराय पथ प्रमंडल में परियोजनाओं के निर्माण में समस्याओं की जानकारी मिलने पर विभाग की तरफ से मुख्य अभियंता, दक्षिण और अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन) को स्थल निरीक्षण कर आवश्यक निर्णय लेकर समस्याओं का निदान करने का निर्देश दिया गया. दोनों विभागों ने अपने-अपने अभियंताओं से कहा है कि परियोजना में काम करने में हो रही कठिनाई के लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागीय पदाधिकारियों से नियमित रूप से संपर्क करें.
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