कैमूर के इस मंदिर में बलि देने पर भी नहीं गिरता बकरे का खून, जानिए इस चमत्कार के पीछे का रहस्य

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Feb 2023 3:52 PM

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मुंडेश्वरी देवी मंदिर कैमूर के पंवरा पहाड़ी के शिखर पर स्थित है. जिसकी ऊंचाई लगभग 600 फीट है. पुरातत्वविदों के अनुसार यहां से प्राप्त शिलालेख 389 ई. के बीच का है. मंदिर परिसर में कुछ शिलालेख ब्राह्मी लिपि में हैं.

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बिहार में कैमूर की पहाड़ियों में स्थित देश के सबसे प्राचीनतम मंदिरों में से एक मां मुंडेश्वरी देवी का मंदिर है. खूद में अनेकों रहस्य समेटे इस मंदिर को विकसित किया जा रहा. चमत्कारों से भरे इस मंदिर में पहुंचने का रास्ता भी सुगम है. भभुआ रेलवे स्टेशन से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर यह धाम स्थित है. कैमूर जिले के भभुआ प्रखंड में पड़ने वाले इस मंदिर तक आप सड़क मार्ग से भी जा सकते हैं.

रक्तहीन होती है बलि

माता मुंडेश्वरी मंदिर में भक्तों के आंखों के सामने चमत्कार होता है. इस मंदिर में कई तरह के रहस्य समाहित हैं. ऐसी मान्यता है कि भक्तों द्वारा सच्चे मन से यहां मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त यहां बकरे की बली देते है. इस मंदिर में बलि की प्रकिया थोड़ी अलग है. यहां सात्विक तरीके से रक्तहीन बलि दी जाती है. भक्त मन्नत पूरी होने के बाद यहां बलि चढ़ाने के लिए बकरा ले कर आते है, लेकिन यहां बकरे का जीवन नहीं लिया जाता. यहां बस बकरे को मां के चरणों में लिटा देने से बलि पूरी हो जाती है.

मां के चरणों में रखे जाने के बाद बलि का बकरा तब तक नहीं उठता जब तक पुजारी सभी प्रक्रिया पूरी करते हुए मां मुंडेश्वरी का नाम लेकर उस पर अक्षत नहीं छिड़कते. अक्षत फेंकते ही बकरा वापस उठ खड़ा होता है. इसके बाद बलि की प्रक्रिया पूरी होता है और पुजारी जिसका बकरा होता है वह उसे उसको सौंप देते हैं. इस मंदिर में केवल हिंदू ही नहीं अन्य धर्मों के लोग भी बलि देने आते हैं.

बलि से पहले संकल्प 

माता मुंडेश्वरी मंदिर में बलि देने से पहले भी एक प्रक्रिया की जाती है. इसके लिए भक्तों को सबसे पहले रशीद कटानी होती है. यहां दो रशीद कटती है एक 21 रुपये की और दूसरी 51 रुपये की. यानी बलि से पहले आपको कूल 72 रुपये की रशीद कटानी होगी. इसक एबाद मंदिर के बाहर बने हवं कुंड के पास बकरे का संकल्प कराया जाता है. संकल्प की यह पूरी प्रक्रिया उन्हीं के हाथों से कराई जाती है जिनके नाम से मन्नत होती है.

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अष्टाकार गर्भगृह में विराजती हैं देवी 

बता दें कि यह मंदिर कैमूर के पंवरा पहाड़ी के शिखर पर स्थित है. जिसकी ऊंचाई लगभग 600 फीट है. पुरातत्वविदों के अनुसार यहां से प्राप्त शिलालेख 389 ई. के बीच का है. मंदिर परिसर में कुछ शिलालेख ब्राह्मी लिपि में हैं. मंदिर का अष्टाकार गर्भगृह है. जिसमें देवी विराजती हैं. मंदिर में मां मुंडेश्वरी वाराही रूप में विराजमान है, जिनका वाहन महिष है. मंदिर में प्रवेश के चार द्वार हैं जिसमें एक को बंद कर दिया गया है.

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