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Lok Sabha Election 2024: पांचवें चरण में इनके सामने विरासत बचाने की चुनौती

Lok Sabha Election 2024 बिहार में होनें वाले पांचवें चरण के चुनाव में पांच सीटों में से चार सीटों मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सारण और हाजीपुर में प्रमुख दलों के उम्मीदवार अपनी विरासत बचाने के लिए मैदान में उतरे हैं.

कैलाशपति मिश्र,पटना

Lok Sabha Election 2024 बिहार में लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में 20 मई को पांच सीटों पर चुनाव होना है. ये लोकसभा क्षेत्र हैं- सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सारण और हाजीपुर. इन पांचों सीटों में से चार सीटों यथा मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सारण और हाजीपुर में प्रमुख दलों के उम्मीदवार अपनी विरासत बचाने के लिए मैदान में उतरे हैं. मधुबनी से जहां अशोक कुमार यादव, मुजफ्फरपुर से अजय निषाद, सारण में रोहणी आचार्या और हाजीपुर से चिराग पासवान प्रमुख हैं. इन चारों के पिता संबंधित लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

मधुबनी से अशोक कुमार यादव दूसरी बार संसद पहुंचने की तैयार में

मधुबनी लोकसभा सीट से भाजपा के निवर्तमान सांसद और वर्तमान उम्मीदवार दूसरी बार संसद की दहलीज लांघने की तैयारी में हैं. इससे पहले इस सीट से 2009 और 2014 लोकसभा चुनाव में उनके पिता हुकूमदेव नारायण यादव प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. एक तरह से अशोक अपने पिता से मिली राजनीतिक विरासत को संभाल रहे हैं. लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा के अशोक कुमार यादव ने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की थी. अशोक कुमार यादव ने वीआइपी उम्मीदवार बद्री कुमार पूर्वे को 4.55 लाख मतों से पराजित किया था. इस लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अशोक कुमार यादव को एक बार फिर अपना उम्मीदवार बनाया है,जबकि राजद के अली असरफ फातमी उनके विरुद्ध मैदान में उतारा है.

अजय निषाद के लिए मुजफ्फरपुर सीट बचाने की चुनौती

2019 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरपुर से भाजपा के टिकट पर चुनाव जितने वाले अजय निषाद इस बार कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं. वे इससे पहले इस सीट से 2014 में भी चुनाव जीते थे. इससे पहले इस सीट से उनके पिता कैप्टन जयनारायण निषाद 2009, 1996, 1998 और 1999 में चुनाव जीत चूकें हैं. यह सीट एक तरह से अजय निषाद को विरासत में मिली है. इस बार इस सीट से भाजपा ने 2019 लोकसभा चुनाव में वीआइपी के टिकट से भाजपा के अजय निषाद के खिलाफ चुनाव हार चुके डॉ राजभूषण चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया है. इस बार अजय निषाद के सामने मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट बचाने की चुनौती है.

रोहिणी के सामने पिता लालू प्रसाद की विरासत बचाने की चुनौती

छपरा लोकसभा सीट से 1977 में चुनाव जीतकर पहली बार लालू प्रसाद संसद पहुंचे थे. उसी सीट से (हालांकि परिसीमन के बाद उसका नाम बदलकर सारण कर दिया गया है) उनकी बेटी रोहणी आचार्या चुनाव लड़ रही है. रोहिणी पहली बार राजनीति के मैदान में उतरी हैं. लालू प्रसाद इस सीट से 1989, 2004 और 2009 में लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं. अब उनकी बेटी यहां से अपनी किस्मत आजमा रही हैं. 2014 के चुनाव में भाजपा के राजीव प्रताप रूडी ने पूर्व मुख्यमंत्री और रोहणी की मां राबड़ी देवी को और 2019 में राजद के चंद्रिका राय को शिकस्त दे चुके हैं.

पिता की विरासत संभालने हाजीपुर से चिराग लड़ रहे हैं चुनाव

हाजीपुर रामविलास पासवान की कर्म भूमि रही है. वे हाजीपुर लोकसभा सीट से सात बार सांसद रहे थे. इस लोकसभा चुनाव में उनके बेटे चिराग पासवान जमुई की सीट को छोड़ कर हाजीपुर से चुनाव लड़ रहे हैं. रामविलास पासवान इस सीट से पहली बार 1977 में चुनाव जीतकर सांसद पहुंचे थे. उसके बाद वे 1980, 1989, 1996, 1998, 1999, 2004 और 2014 में चुनाव जीते. इसके बाद उन्होंने हाजीपुर लोकसभा सीट अपने भाई पशुपति कुमार पारस के लिए छोड़ दी. रामविलास पासवान के निधन के बाद चाचा-भतीजे में विवाद के बाद पार्टी बंट गयी और चिराग ने हाजीपुर से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया.

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