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330 करोड़ के निवेश के लिए 15 इकाइयों को जमीन आवंटित

Updated at : 07 Aug 2025 7:03 PM (IST)
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330 करोड़ के निवेश के लिए 15 इकाइयों को जमीन आवंटित

बियाडा की परियोजना मंजूरी समिति (पीसीसी) ने 330.51 करोड़ के प्रस्तावित निवेश के लिए जमीन आवंटित कर दी है.

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-एचपीसीएल करने जा रही 100 करोड़ का निवेश

संवाददाता,पटना

बियाडा की परियोजना मंजूरी समिति (पीसीसी) ने 330.51 करोड़ के प्रस्तावित निवेश के लिए जमीन आवंटित कर दी है. इसमें सबसे अधिक निवेश यूनिट एचपीसीएल रिन्यूअल एंड ग्रीन एनर्जी लिमिटेड की होगी, जो 100 करोड़ का निवेश करने जा रही है. इस कंपनी को बियाडा ने 851598 वर्गफुट (19.55 एकड़) जमीन दी गयी है.

आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह कंपनी बरियारपुर औद्योगिक क्षेत्र में कंप्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन करेगी. 15 इकाइयों को यह जमीन 12 विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित की जायेंगी. इनमें दो पटना में निवेश कर रही हैं. समिति की बैठक की अध्यक्षता बियाडा के प्रबंध निदेशक कुंदन कुमार ने की. इस निवेश में करीब 1022 लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार हासिल होंगे. . आधिकारिक जानकारी के अनुसार पीसीसी की बैठक में औद्योगिक भूखंड पटना, बक्सर, मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण, जहानाबाद, भागलपुर, पूर्णिया, मधेपुरा, अररिया और सहरसा औद्योगिक क्षेत्रों में दिये गये , जिनका कुल क्षेत्रफल 41.17 एकड़ है. ये इकाइयां संपीडित बायोगैस, खाद्य प्रसंस्करण, सामान्य विनिर्माण और आइटी एवं आइटीइ सहित विविध क्षेत्रों की यूनिट स्थापित करेंगी. एचपीसीएल के अलावा जमीन हासिल करने वाली कंपनियों में मेसर्स वर्धन बिजनेस एसोसिएट प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स ईथर मेटालिका, मेसर्स सीएस टूल्स को उद्योग लगाने के लिए भूमि आवंटित की गयी है.

इनके अलावा एसआइपीबी ने जयदयाल हाइटेक्स प्राइवेट लिमिटेड के करीब 11.27 करोड़ रुपये के निवेश को वित्तीय क्लियरेंस दिया है. जल्दी ही इस कंपनी को भी भूमि आवंटित की जायेगी. बता दें कि प्रोजेक्ट क्लीयरेंस कमेटी (पीसीसी) हफ्ते में एक बार बैठक कर आवेदन के हिसाब से औद्योगिक कंपनियों को यूनिट प्रदान करती है.

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रंगरेज,धुनिया और दर्जी समाज की समितियों का हुआ निबंधन

पटना. बिहार की पारंपरिक रंगरेज, धुनिया एवं दर्जी समाज की परंपरा को संस्थागत आधार देने की दिशा में आर्टिजन विकास समितियों के निबंधन की प्रक्रिया पूरी हो गयी है. यह समितियां अब औपचारिक रूप से निबंधित संस्थाएं हैं, जिनके माध्यम से प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाज़ार तक पहुंच, और योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जायेगा .

उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि यह केवल एक प्रशासकीय कार्य नहीं ,बल्कि एक ऐतिहासिक सुधार प्रक्रिया है जो उन हजारों हस्तशिल्पियों और दस्तकारों को सशक्त बनायेगी जो वर्षों से अपनी पहचान और संरचना की राह देख रहे थे. यह साझा करते हुए संतोष हो रहा है कि इन समितियों की निबंधन प्रक्रिया अब विधिवत रूप से पूर्ण कर ली गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Rajdev Pandey is a contributor at Prabhat Khabar.

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