'गांधी मैदान की संपूर्ण क्रांति का गवाह हूं', पटना में बरसे जेपी नड्डा, याद दिलाया 1975 का आपातकाल

Edited by Paritosh Shahi
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केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा

Samvidhan Hatya Diwas: केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पटना में संविधान हत्या दिवस पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया. उन्होंने 1975 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला बताते हुए कहा कि इसकी रक्षा की लड़ाई बिहार से शुरू हुई थी. नड्डा ने इस दौरान जेल, नसबंदी और घर तोड़े जाने के आंकड़े भी पेश किए.

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Samvidhan Hatya Diwas: केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पटना में आयोजित संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया इमरजेंसी भारतीय लोकतंत्र, हमारे संविधान और नागरिकों की आजादी पर सबसे क्रूर हमला था. उन्होंने बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई का असली बीज इसी बिहार और पटना की पावन धरती पर बोया गया था. यही वजह है कि देश भर में हो रहे आयोजनों के बीच पटना के इस कार्यक्रम का एक अलग और बहुत बड़ा महत्व है.

पटना का गांधी मैदान और संपूर्ण क्रांति का वो ऐतिहासिक आंदोलन

ज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा पुरानी यादों में खो गए. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल से थोड़ी ही दूर पर स्थित ऐतिहासिक गांधी मैदान उस महान आंदोलन का गवाह है, जहां 5 जून 1974 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था.

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वह खुद अपने छात्र जीवन के दौरान इस आंदोलन का एक सक्रिय हिस्सा रहे हैं और उन्होंने उस दौर के अत्याचारों को अपनी आंखों से देखा है. उनके मुताबिक 18 मार्च 1974 और 5 जून 1974 को हुई घटनाएं ही उस बड़े जनांदोलन की सबसे मजबूत नींव बनी थीं, जिसने आगे चलकर तानाशाही को उखाड़ फेंका.

अपनी कुर्सी बचाने के लिए थोपा गया 21 महीने का काला दौर

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सिर्फ अपनी सत्ता को बचाने के लिए पूरे देश को संकट में डाल दिया था. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जब चुनाव में हुई गड़बड़ियों को लेकर इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला सुनाया और उन्हें दोषी पाया, तब उन्होंने अपनी कुर्सी की खातिर देश पर आपातकाल थोप दिया. यह काला दौर करीब 21 महीनों तक चला, जिसमें अखबारों की आजादी छीन ली गई, आम लोगों के मौलिक अधिकारों को पूरी तरह कुचल दिया गया और हमारे पवित्र संविधान की आत्मा पर सीधा वार किया गया.

जेल, नसबंदी और बेघर लोग

जेपी नड्डा ने दावा किया कि उस दौर में बिना किसी अदालती और कानूनी प्रक्रिया के 1.31 लाख बेकसूर लोगों को जेल की कालकोठरी में बंद कर दिया गया था. यही नहीं, तानाशाही के चलते करीब 1.10 करोड़ लोगों की जबरन नसबंदी कराई गई, जिसमें से अकेले 80 लाख मामले 1975-76 के बीच के थे. उन्होंने यह भी बताया कि उस समय दिल्ली में 1.50 लाख से ज्यादा घर तोड़ दिए गए जिससे सात लाख लोग रातों-रात बेघर हो गए और सच लिखने वाले 300 से अधिक साहसी पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया था.

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42वां संविधान संशोधन और आज संविधान बचाने का ढोंग

कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि आपातकाल के दौरान अपनी ताकत बढ़ाने के लिए 42वां संविधान संशोधन लाया गया था. इसके जरिए नेताओं का कार्यकाल पांच साल से बढ़ाकर छह साल कर दिया गया और कई बड़े पदों को अदालती जांच के दायरे से ही बाहर रखने की कोशिश की गई थी. उन्होंने कहा कि जो लोग आज हाथ में संविधान की किताब लेकर उसे बचाने का नाटक करते हैं, उन्हें सबसे पहले आपातकाल के उस काले कृत्य के लिए पूरे देश से कान पकड़कर माफी मांगनी चाहिए.

अंत में उन्होंने जेपी आंदोलन के सभी वीर सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि इस दिन को याद रखने का एकमात्र मकसद यही है कि हमारी नई पीढ़ी उस दौर के कड़वे सच को जाने और हमेशा लोकतंत्र की रक्षा के लिए सजग रहे.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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