पटना में शुरू हुआ एशिया का सबसे बड़ा श्मशान, 18 शवों का एक साथ होगा अंतिम संस्कार, ये सुविधाएं मिलेंगी
बांसघाट की तस्वीर
Patna Asia Largest Crematorium: पटना में एशिया का सबसे बड़ा श्मशान घाट शुरू हो गया है. बांसघाट में बने इस आधुनिक परिसर में एक साथ 18 शवों का अंतिम संस्कार हो सकेगा. एसी वेटिंग हॉल, इलेक्ट्रिक शवदाह यूनिट और गंगाजल तालाब जैसी सुविधाओं से इसे देश के सबसे आधुनिक श्मशान घाटों में शामिल किया जा रहा है.
Patna Asia Largest Crematorium: पटना में एशिया का सबसे बड़ा और आधुनिक श्मशान घाट तैयार हो गया है. बांसघाट श्मशान का संचालन शुरू कर दिया गया है. करीब 4.5 एकड़ में फैला यह परिसर अंतिम संस्कार की पारंपरिक व्यवस्था को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ता है.
आपके शहर में
यहां एक साथ 18 शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है. इस वजह से बड़े शहरों में अंतिम संस्कार के दौरान होने वाली भीड़ और इंतजार की समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है.
अंतिम यात्रा में आने वालों के लिए भी विशेष सुविधाएं
बांसघाट श्मशान को केवल शवदाह स्थल नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित परिसर के रूप में विकसित किया गया है. यहां आने वाले लोगों के लिए दो वातानुकूलित वेटिंग हॉल बनाए गए हैं. इसके अलावा कैंटीन, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. गंगाजल से भरे दो तालाब भी बनाए गए हैं. इनमें एक स्नान के लिए और दूसरा अस्थि विसर्जन के लिए निर्धारित किया गया है.
अंतिम संस्कार के लिए तय किए गए शुल्क
श्मशान घाट में विभिन्न सेवाओं के लिए शुल्क निर्धारित किया गया है.
- शवदाह शुल्क : 3500 रुपये
- डोम राजा शुल्क : 500 रुपये
- पंडित शुल्क : 250 रुपये
- नाई शुल्क : 150 रुपये
यदि कोई परिवार लकड़ी से अंतिम संस्कार कराना चाहता है तो लकड़ी का खर्च अलग से देना होगा.
8 पारंपरिक चबूतरे, 4 इलेक्ट्रिक यूनिट और 6 आधुनिक भट्टियां
बांसघाट श्मशान में पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह की सुविधाएं मौजूद हैं. यहां 8 पारंपरिक चबूतरे बनाए गए हैं, जहां लकड़ी से अंतिम संस्कार किया जा सकता है. इसके अलावा 4 इलेक्ट्रिक शवदाह इकाइयां और 6 पर्यावरण अनुकूल लकड़ी आधारित भट्टियां स्थापित की गई हैं. इन व्यवस्थाओं के कारण एक समय में 18 लोगों की अंत्येष्टि संभव हो सकेगी.
गरीब परिवारों को मिलेगी मुफ्त सुविधा
ईशा फाउंडेशन ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को मुफ्त अंतिम संस्कार की सुविधा दी जाएगी. हालांकि यह व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है, लेकिन इसके लिए तैयारी की जा रही है.
जल्द शुरू होंगे गैस आधारित फर्नेंस
श्मशान परिसर में गैस से चलने वाले आधुनिक फर्नेंस भी तैयार किए जा रहे हैं. अगले 15 दिनों के भीतर इनके शुरू होने की संभावना है. इनके चालू होने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया और अधिक तेज, सुविधाजनक और कम खर्चीली हो जाएगी.
ईशा फाउंडेशन संभाल रहा संचालन
बांसघाट श्मशान का संचालन ईशा फाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है. संस्था ने तमिलनाडु से प्रशिक्षित वॉलंटियरों की तैनाती की है. इनमें कई ऐसे युवा भी शामिल हैं जिन्होंने अपनी पेशेवर नौकरियां छोड़कर सामाजिक सेवा का रास्ता चुना है. फाउंडेशन पहले से तमिलनाडु में 33 शवदाह गृहों का संचालन कर रहा है.
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बिहार के अन्य शहरों में भी बनेगा आधुनिक ढांचा
ईशा फाउंडेशन और बिहार सरकार के बीच हुए समझौते के तहत राज्य के कई प्रमुख शहरों में श्मशान घाटों को आधुनिक बनाने की योजना है. पटना के दीघा घाट में एलपीजी आधारित शवदाह गृह बनाया जाएगा. वहीं बेगूसराय के सिमरिया घाट, भागलपुर, गया, सहरसा और छपरा में भी आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की तैयारी चल रही है.
पहली बार बिहार आ रहे हैं सद्गुरु
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक Sadhguru 26 जून से तीन दिवसीय बिहार दौरे पर आ रहे हैं. अपने दौरे के दौरान वे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात करेंगे. 27 जून को पटना के बापू सभागार में उनका कार्यक्रम आयोजित होगा. 28 जून को वे तमिलनाडु लौट जाएंगे.
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