डाउनलोड ही नहीं हो रहा तो कैसे देखेंगे ऑनलाइन खतियान
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 20 Sep 2024 12:54 AM
राज्य में जमीन सर्वे के लिए दस्तावेज जुटाने को लेकर लोग आये दिन किसी न किसी परेशानी का सामना कर रहे हैं.
संवाददाता, पटना राज्य में जमीन सर्वे के लिए दस्तावेज जुटाने को लेकर लोग आये दिन किसी न किसी परेशानी का सामना कर रहे हैं. ऐसा ही मामला अब खतियान का है. जमीन के सबसे जरूरी दस्तावेज में शामिल खतियान को इन दिनों ऑनलाइन देखना बड़ी समस्या बन गई है. यदि आप केवल अपना खतियान ऑनलाइन देखना चाहते हैं और इसकी प्रक्रिया जब शुरू करेंगे तो आपके पूरे गांव या मौजा का खतियान एक साथ डाउनलोड होना शुरू होगा. इस कारण फाइल बड़ी और भारी हो जाती है, जिससे यह आसानी से डाउनलोड नहीं हो रही. जब लोगों को खतियान ऑनलाइन नहीं मिलता है तो लोग अंचल और सर्वे कार्यालय का चक्कर लगाना शुरू करते हैं. फिर वहां शुरू होता है भ्रष्टाचार का खेल और आवेदक परेशान होते हैं. जब ऑनलाइन खतियान डाउनलोड होने की समस्या की जानकारी लेने की कोशिश की गई तो पता चला कि खतियान का डिजिटाइजेशन हुआ ही नहीं है. राजस्व एवं भूमि सुधार द्वारा जारी वेबसाइट पर स्कैन कर रैयतों का खतियान डाला गया है. इस कारण जब लोग संबंधित मौजा का खतियान देखना चाहते हैं तो यह एक साथ पूरे मौजा या गांव का खतियान डाउनलोड होना शुरू होता है. इस कारण एक बार में करीब एक हजार खतियान एक साथ डाउनलोड होने की प्रक्रिया शुरू होती है. यह इतनी बड़ी फाइल होती है कि इसे डाउनलोड में जब लगाया गया तो चार घंटे में भी यह नहीं हो पाया. बाद में सर्वर एरर बता दिया गया. ऐसे में जमीन के सभी दस्तावेज ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध होने से संबंधी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सभी दावे खोखले साबित होते हैं. क्यों जरूरी है खतियान जानकारों का कहना है कि जमीन का खतियान मिल जाने के बाद उसमें दर्ज खाता, खेसरा, रकवा सहित रैयत का नाम और चौहद्दी आसानी से मिल जाती है. इन सभी विवरणों की जरूरत जमीन सर्वे के लिए ऑनलाइन आवेदन के समय पड़ती है. इसके साथ ही खतियान के विवरणों के आधार पर लोग भू-लगान भी दे सकते हैं. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऑनलाइन खतियान निकालने का शुल्क भी केवल 10 रुपये रखा है. ऐसे में ऑनलाइन खतियान उपलब्ध हो जाने से लोगों को अंचल और सर्वे कार्यालयों का चक्कर लगाने से राहत मिल जायेगी.
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