साधु यादव बोले- शहाबुद्दीन की वजह से यादव समाज बदनाम हुआ, भांजे तेजस्वी को भी दी नसीहत

Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 31 May 2026 1:41 PM

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साधु यादव की फाइल फोटो

Bihar Politics: लालू यादव के बड़े साले और पूर्व सांसद साधु यादव ने एक पॉडकास्ट में शहाबुद्दीन, तेजस्वी यादव और अपने परिवार को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने शहाबुद्दीन पर बड़ा बयान दिया और तेजस्वी यादव को जनता के बीच जाने की सलाह दी.

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Bihar Politics: लालू यादव के बड़े साले और पूर्व सांसद साधु यादव ने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में कई मुद्दों पर खुलकर बात की. इस दौरान उन्होंने दिवंगत मोहम्मद शहाबुद्दीन, तेजस्वी यादव, अपने भाई सुभाष यादव और लालू यादव को लेकर बेबाक राय रखी.

साधु यादव ने कहा कि शहाबुद्दीन की वजह से यादव समाज और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा. उन्होंने दावा किया कि शहाबुद्दीन के पास उनके सामने खड़े होने की भी हिम्मत नहीं थी. उनका कहना था कि कुछ लोगों की वजह से पूरे समाज और राजनीतिक संगठन को गलत तरीके से देखा जाने लगा.

तेजस्वी यादव को दी जनता के बीच जाने की सलाह

तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर बात करते हुए साधु यादव ने कहा कि अगर उन्हें सत्ता में वापसी करनी है तो रोजाना हजारों लोगों से मिलना होगा. उन्होंने कहा कि नेताओं को जनता के बीच रहना चाहिए और लोगों की समस्याएं सुननी चाहिए. जनता से सीधा संवाद ही राजनीति की सबसे बड़ी ताकत होती है.

‘गलत लोगों के चक्कर में मत पड़ो’

साधु यादव ने तेजस्वी यादव को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें गलत लोगों की संगत से बचना चाहिए और सीधे कार्यकर्ताओं व आम लोगों से जुड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब नेता जनता के बीच जाता है तो उसे असली मुद्दों और लोगों की जरूरतों की जानकारी मिलती है.

पप्पू यादव का भी किया जिक्र

बातचीत के दौरान साधु यादव ने पूर्णिया सांसद पप्पू यादव का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज भी पप्पू यादव उनसे मिलने उनके घर आते हैं और पुराने रिश्तों को निभाते हैं.

छोटे भाई सुभाष यादव पर साधा निशाना

इंटरव्यू में साधु यादव ने अपने छोटे भाई सुभाष यादव पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि राजद को मजबूत बनाने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की, लेकिन सुभाष यादव की गतिविधियों की वजह से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा. उन्होंने कहा कि गलत काम कोई और करता था, लेकिन बदनामी उनके हिस्से में आती थी.

कैसे पड़ा ‘साधु’ नाम?

साधु यादव ने अपने नाम से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया. उन्होंने बताया कि उनके जन्म के समय घर पर साधुओं का आना-जाना था. जन्म के बाद साधुओं ने उन्हें देखकर कहा था कि यह बच्चा साधु है. तभी से परिवार और गांव के लोग उन्हें साधु कहकर बुलाने लगे.

लालू यादव को लेकर दिखे नरम

करीब एक घंटे के पॉडकास्ट में साधु यादव का रुख लालू यादव को लेकर अपेक्षाकृत नरम दिखाई दिया. उन्होंने लालू यादव के संघर्ष और राजनीतिक सफर का जिक्र किया. साधु यादव ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान लालू यादव लंबे समय तक उनके ससुराल में रहे थे. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कई नेताओं ने अलग-अलग समय पर लालू यादव को सामाजिक न्याय का बड़ा नेता बताया था.

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By Abhinandan Pandey

अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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