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पेज1, हाइकोर्ट : 10 दिनों में विवि को स्वीकृत बजट राशि भेजे शिक्षा विभाग नहीं तो एसीएस समेत सभी अधिकारी नहीं करेंगे वेतन का उठाव

Updated at : 18 May 2024 1:48 PM (IST)
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पेज1, हाइकोर्ट : 10 दिनों में विवि को स्वीकृत बजट राशि भेजे शिक्षा विभाग नहीं तो एसीएस समेत सभी अधिकारी नहीं करेंगे वेतन का उठाव

हाइकोर्ट : 10 दिनों में विवि को स्वीकृत बजट राशि भेजे शिक्षा विभाग नहीं तो एसीएस समेत सभी अधिकारी नहीं करेंगे वेतन का उठाव

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विधि संवाददाता, पटना पटना हाइकोर्ट ने शिक्षा विभाग को फटकार लगाते हुए कहा है कि शिक्षा विभाग द्वारा जिस वित्तीय वर्ष के लिए पैसा देने की स्वीकृति दी गयी है, उस बजट सत्र की राशि को वह दस दिन के अंदर संबंधित विश्वविद्यालय को उपलब्ध करा दे, नही तो शिक्षा विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी समेत सभी संबंधित अधिकारी अपने वेतन का उठाव नहीं करेंगे. कोर्ट में शुक्रवार को राज्य के विश्वविद्यालयों के बजट की समीक्षा के लिए बुलायी गयी बैठक में भाग नहीं लिये जाने पर विश्वविद्यालय के सभी खातों के संचालक पर अगले आदेश तक रोक लगाने और बैठक में भाग नहीं लेने वाले अधिकारियों से स्पष्टीकरण की मांग करने के मामले में सुनवाई हुई. न्यायाधीश अंजनी कुमार शरण की एकल पीठ ने राज्य के सभी संबंधित विश्वविद्यालय द्वारा इस मामले को लेकर दायर 11 रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 25 जून को निर्धारित करते हुए कहा कि इस बीच शिक्षा विभाग द्वारा 10 मई और 16 मई को जारी किए गए पत्र के कार्यान्वयन पर रोक लगी रहेगी.कोर्ट ने कहा कि कुलपति और अधिकारी अहम का मुद्दा नहीं बना काम की बात करें. कोर्ट ने कहा की उन्हें पता है कि यह मामला बहुत दिनों से चल रहा है इसलिए इसका निदान निकलना आवश्यक है और कोर्ट इस मामले में इसका हल जरूर निकलेगा .इसके पूर्व विश्वविद्यालय की ओर अधिवक्ता विंध्याचल राय, सिद्धार्थ प्रसाद,रितेश कुमार, राणा विक्रम सिंह, मो असहर मुस्तफा, राजेश प्रसाद चौधरी ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने गत 16 मई को पत्र जारी कर विश्वविद्यालयों के बजट की समीक्षा के लिए बुलायी गयी बैठक में भाग नहीं लिये जाने पर विश्वविद्यालय के सभी खातों के संचालक पर अगले आदेश तक रोक लगा दिया है. साथ ही बैठक में भाग नहीं लेने पर संबंधित कुलपति और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण की मांग करते हुए उनके वेतन पर रोक लगा दी है.यही नहीं उन्हें उनके पद से उन्हें पदच्युत करने की भी बात विभाग द्वारा कही गयी हैं.

वकीलों का कहना था कि विश्वविद्यालय कानून के तहत शिक्षा विभाग को विश्वविद्यालय के किसी भी कर्मी को पदच्युत करने का अधिकार नहीं है. शिक्षा विभाग द्वारा जो बजट

मंजूर किया गया है, उसे भी जारी नहीं किया जा रहा है.

महाधिवक्ता ने कहा, जबतक कुलपति बैठक में नहीं आयेंगे तो एक पैसा नहीं देगा शिक्षा विभाग

इसके पहले राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पीके शाही ने कोर्ट को बताया कि विभाग द्वारा बुलाई गई बैठक में जब तक वीसी भाग नहीं लेंगे तब तक शिक्षा विभाग एक पैसा नहीं नही दिया जायेगा . उनका कहना था की ये लोग सिर्फ तनख्वाह लेने के लिए विश्वविद्यालय को खोले हुये हैं. उन्होंने कहा की कुलपति की नियुक्ति कैसे होती है, यह सभी को पता है . वहां केवल पैसे का खेल हो रहा है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि अगले वित्तीय वर्ष के प्रस्तावित बजट समीक्षा बैठक में सभी कुलपति को भाग लेने को कहा गया था.

लेकिन, बैठक में किसी ने भी भाग नही लिया . उनका कहना था कि 15 मई से 29 मई के बीच सूबे के 13 विश्वविद्यालयों को बैठक में भाग लेने के लिए समय तय किया गया था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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