पटना. राज्य में मातृ मृत्यु दर पर नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने एक नयी पहल की है. राज्य में वैसी गर्भवती जिनका हीमोग्लोबिन लेवल सात से कम है, उन पर आशा एवं एएनएम द्वारा विशेष निगरानी रखी जायेगी. ऐसी गर्भवती महिलाओं को सीवियर एनीमिया (खून की कमी) के केस में भी लिस्ट किया जायेगा. ऐसी उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों का बेहतर प्रबंधन होगा और उन्हें उचित आयरन फॉलिक एसिड की दवाएं दी जायेंगी. पटना एम्स की एडिशनल प्रोफेसर डॉ इंदिरा प्रसाद कहती हैं कि गर्भवतियों में एनीमिया का होना उनके प्रसव के खतरों को बढ़ा देता है.
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