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Patna News : फाइनेंस कंपनियों के नाम पर लोन देने का झांसा देकर दो हजार लोगों से पांच करोड़ रुपये ठगेे, पांच शातिर गिरफ्तार

Updated at : 19 Dec 2024 1:30 AM (IST)
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Patna News : फाइनेंस कंपनियों के नाम पर लोन देने का झांसा देकर दो हजार लोगों से पांच करोड़ रुपये ठगेे, पांच शातिर गिरफ्तार

पुलिस ने फाइनेंस कंपनियों के नाम लोन देने का झांसा देकर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है़ इन शातिरों ने अब तक दो हजार लोगों से करीब पांच करोड़ की ठगी की है.

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संवाददाता, पटना : पटना साइबर थाने की पुलिस ने फाइनेंस कंपनियों के नाम लोन देने का झांसा देकर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने इस गिरोह के पांच शातिरों को गिरफ्तार किया है. इनमें एक गोपाल कुमार उर्फ राहुल नालंदा, जबकि चार गुट्टा शिवाकुमार, मारुती, वारला सुपाकर व पी विकम तेलंगाना के निवासी हैं. इनके पास से 13 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और तीन स्टांप के साथ पांच एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं. मिली जानकारी के अनुसार इन शातिरों ने अब तक दो हजार लोगों से करीब पांच करोड़ की ठगी की है. इन सभी की गिरफ्तारी रामकृष्णानगर थाने के जगनपुरा स्थित डीवाइ पाटिल स्कूल के पीछे एक मकान के पांचवें तल्ले पर स्थित एक किराये के कमरे से हुई है. कमरे में पुलिस ने कई डायरी भी बरामद की है, जिनमें दिये गये नंबर की जांच की जा रही है.

सोशल मीडिया पर देते थे विज्ञापन

साइबर थाने के डीएसपी राघवेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि इनके पास से बरामद लैपटॉप और मोबाइल में 2000 से ज्यादा लोगों के डॉक्यूमेंट मिले हैं. इन लोगों ने अब तक लगभग पांच करोड़ की ठगी की है. गिरफ्तार सरगना गोपाल कुमार उर्फ राहुल ने बताया कि रिलायंस कंपनी और बजाज फाइनेंस के नाम पर लोन दिलाने के लिए फेंक ऐड बना कर फेसबुक व इंस्टाग्राम पर भेजते थे. इसमें हमारा मोबाइल नंबर होता है. लोन लेने के लिए जो हमें फोन करता है, उसको झांसे में लेते थे. फिर उससे लोन प्रॉसेसिंग व जीएसटी के नाम पर 15 से 20 हजार तक लेते थे. इन लाेगाें की भाषा भी अलग थी. और इनके माेबाइल व लैपटाॅप की जांच की गयी, तो पता चला कि साइबर अपराधियाें का गिराेह है, जाे लाेन दिलाने के नाम पर ठगी करता है.

प्रतिबिंब एप की मदद से चार तेलंगाना और एक नालंदा का सदस्य पकड़ाया

साइबर थाने के डीएसपी राघवेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस के पास प्रतिबिंब एप है. उसी में कई संदिग्ध नंबर थे. उन नंबराें की जांच की गयी, ताे पता चला कि दाे-तीन माेबाइल नंबर एक्टिव हैं और बार-बार इससे ठगी हो रही है. उसके बाद इंस्पेक्टर अनिल कुमार, एसआइ धर्मेंद्र कुमार के नेतृत्व में टीम बनायी गयी. माेबाइल का लाेकेशन लेने के बाद पुलिस जगनपुर स्थित उस किराये के मकान में पहुंची. पुलिस काे देख सभी हड़बड़ा गये. इसके बाद सभी काे पकड़ा गया. ये सभी मैट्रिक से इंटर तक पढ़े हुए हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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