कुचर्बोस्की में गूंजे साहित्य के स्वर

Updated at : 15 Apr 2025 7:39 PM (IST)
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कुचर्बोस्की में गूंजे साहित्य के स्वर

साहित्यिक संस्था आयाम की ओर से कुचर्बोस्की में एक विशेष साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें सदस्यों द्वारा स्वयं लिखित कहानियों और कविताओं का पाठ कर उन पर चर्चा की गयी.

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साहित्यिक रंगों से सजी ‘आयाम’ की शाम पटना. साहित्यिक संस्था आयाम की ओर से कुचर्बोस्की में एक विशेष साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें सदस्यों द्वारा स्वयं लिखित कहानियों और कविताओं का पाठ कर उन पर चर्चा की गयी. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता आयाम की अध्यक्ष डॉ नीलिमा सिंह ने की. बतौर विशिष्ट अतिथि प्रो शिवनारायण सिंह और सत्येंद्र उपस्थित रहे. कार्यक्रम की शुरुआत आयाम की सचिव प्रो वीणा अमृत ने की, जिन्होंने परिचर्चा के उद्देश्य और विषयवस्तु पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर डॉ अर्चना त्रिपाठी ने कल्याणी कुसुम की कविताएं- ‘जिंदगी आंसू’, ‘मेरा मित्र मेरा दुश्मन’, ‘जब मैं मिली प्रेत से’ और ‘मैं विवश हूं’ का पाठ किया. मीरा मिश्रा ने अपनी कहानी कनिया का पाठ किया, जबकि डॉ उषा सिंह ने उषा सिन्हा की कहानी ‘इच्छा मुक्ति’ का पाठ किया. कार्यक्रम में अनेक साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से भावना शेखर, सौम्या सुमन, सुनीता गुप्ता, अर्चना त्रिपाठी, शाइस्ता अंजुम, डॉ रंजीता तिवारी और पूनम सिन्हा शामिल रहीं.

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