एआइ आधारित भ्रामक प्रचार पर चुनाव आयोग की सख्ती

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एआइ आधारित भ्रामक प्रचार पर चुनाव आयोग की सख्ती

बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित भ्रामक और फर्जी प्रचार सामग्री पर सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किये जाने के साथ ही बिहार पुलिस और उसकी विभिन्न एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गयी हैं.

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संवाददाता, पटना बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित भ्रामक और फर्जी प्रचार सामग्री पर सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किये जाने के साथ ही बिहार पुलिस और उसकी विभिन्न एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गयी हैं. आयोग के आदेश के बाद राज्य के गृह विभाग ने साइबर क्राइम यूनिट, आर्थिक अपराध इकाई (इओयू ) और जिला पुलिस को विशेष निगरानी के निर्देश जारी कर दिये हैं. सूत्रों के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिया है कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वाट्सएप पर निगरानी बढ़ाएं और राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों से जुड़े वीडियो, पोस्ट या ग्राफिक कंटेंट की नियमित जांच करें. निर्देश में कहा गया है कि एआइ या डिजिटल तकनीक से तैयार किसी भी ‘डीपफेक’ या ‘मॉर्फ्ड’ सामग्री की पहचान होते ही उसकी तुरंत रिपोर्ट की जाए और संबंधित अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई की जाए.साइबर अपराध इकाई ने भी तकनीकी निगरानी बढ़ा दी है. पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, और गया सहित सभी रेंज अधिकारियों और साइबर थानों को निर्देश दिया गया है कि वे जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर हर दिन सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे चुनावी संदेशों की स्कैनिंग करें. किसी भी भ्रामक या फर्जी वीडियो के स्रोत का पता लगाकर त्वरित प्राथमिकी दर्ज करने को कहा गया है. निर्वाचन आयोग ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया था कि चुनावी अखंडता की रक्षा के लिए एआइ या सिंथेटिक कंटेंट के दुरुपयोग पर सख्त निगरानी रखी जा रही है. आयोग ने राजनीतिक दलों को चेतावनी दी है कि यदि वे अपने प्रचार में एआइ जनित या डिजिटल रूप से परिवर्तित सामग्री का इस्तेमाल करते हैं, तो उसे एआइ जेनरेटेड, “डिजिटली एन्हैंस्ड या सिंथेटिक कंटेंट के रूप में स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य होगा. पुलिस सूत्रों के अनुसार, पिछले लोकसभा चुनाव में भी कुछ जिलों में भ्रामक वीडियो और डीपफेक ऑडियो के मामले सामने आये थे, जिनकी जांच में तकनीकी कठिनाइयां आयी थीं. इस बार ऐसे मामलों से बचाव के लिए गृह विभाग ने साइबर विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. गौरतलब है कि बिहार में दो चरणों में मतदान छह और 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जायेगी.

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