दानापुर में छह माह में टूटा लाखों की लागत से बना नाला स्लैब, बारिश में हादसे की आशंका

Author Sanjay kumar|Edited by Nikhil Anurag
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दानापुर में टूट रहा नाला स्लैब

दानापुर में टूट रहा नाला स्लैब

Patna drain slab built: दानापुर के विजय बिहार कॉलोनी में लाखों रुपये की लागत से बना आरसीसी नाला का स्लैब केवल छह माह में ही टूटने लगा है. स्थानीय लोगों ने निर्माण में गुणवत्ता से समझौता करने और घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप लगाया है. बारिश में बड़ी दुर्घटना की आशंका है.

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Patna drain slab built: दानापुर नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-39 स्थित विजय बिहार कॉलोनी के रूपसपुर थाना रोड में छह माह पूर्व लाखों रुपये की लागत से निर्मित पीसीसी सड़क और आरसीसी नाला का स्लैब टूटने लगा है. इससे बारिश के दौरान बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बढ़ गई है. स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किए जाने का आरोप लगाया है.

छह माह में ही टूटने लगा नाला का स्लैब

स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब छह माह पहले नगर परिषद की ओर से पीसीसी सड़क और आरसीसी नाला का निर्माण कराया गया था. निर्माण कार्य के बाद इलाके में जलजमाव की समस्या से लोगों को राहत मिली थी, लेकिन छह माह के भीतर ही नाला का स्लैब टूटने लगा है. इससे राहगीरों और स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ गई है.

लोगों का आरोप है कि संवेदक द्वारा निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके कारण इतनी जल्दी नाला क्षतिग्रस्त हो गया. उन्होंने कहा कि इससे नगर परिषद की ओर से कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

निर्माण कार्य में अनियमितता का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद क्षेत्र में सड़क और आरसीसी नाला निर्माण कार्य शुरू होने से पहले संवेदकों की ओर से शिलापट्ट तक नहीं लगाया जाता है. संवेदक मनमाने तरीके से निर्माण कार्य कराते हैं. उनका आरोप है कि आरसीसी नाला निर्माण में 10 एमएम सरिया के उपयोग का प्रावधान है, लेकिन कई जगहों पर 8 एमएम सरिया का उपयोग किया जा रहा है.

बताया जाता है कि नगर परिषद के 40 वार्डों में कराए जा रहे सड़क और आरसीसी नाला निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किए जाने के कारण कई स्थानों पर छह माह के भीतर ही स्लैब टूटने लगे हैं. बारिश के मौसम में टूटे हुए स्लैब लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं.

कमीशनखोरी के भी लगे आरोप

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि निर्माण कार्यों में योजना कर्मियों से लेकर कनीय अभियंता और कार्यपालक पदाधिकारी स्तर तक कमीशन लिया जाता है. संवेदकों का दावा है कि बची हुई राशि से ही निर्माण कार्य कराया जाता है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती है.

जांच के बाद होगी कार्रवाई : ईओ

नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सह प्रशासक एवं एसडीओ अनिरुद्ध पांडेय ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी. जांच में यदि संवेदक दोषी पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा.

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