Domicile in Bihar : बिहार में लागू नहीं होगा डोमिसाइल, बोले मनीष वर्मा- बिहार सबका है

Author Ashish jha
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Domicile in Bihar : संविधान के राइट टू वर्क में प्रावधान है कि कोई भी देश का नागरिक कहीं भी जाकर नौकरी या रोजगार कर सकता है. इसलिए किसी भी स्टेट में यह नीति लागू नहीं है.

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Domicile in Bihar : पटना. बिहार में डोमिसालइल नीति लागू नहीं होगी. जदयू की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक बयान आ गया है. नीतीश कुमार के करीबी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पूर्व आईएएस मनीष वर्मा ने दो टूक कहा है कि बिहार में डोमिसाइल नीति लागू नहीं होगी. ऐसा करना संविधान के प्रावधानों के खिलाफ होगा. उन्होंने कहा कि बिहार सबका है और बिहार के लोग भी पूरे भारत में काम करने जाते हैं. देश के हर नागरिक को कहीं भी काम का अधिकार हमारा संविधान देता है. उन्होंने कहा कि डोमिसालइल देश में लागू राइट टू वर्क कानून के खिलाफ है. इस पर कुछ लोग बेवजह भ्रम फैला रहे हैं.

विपक्ष उठा रहा डोमिसाइल पर सवाल

बिहार के सरकारी स्कूल और कॉलेजों में दूसरे राज्यों के लोगों को नौकरी दिए जाने पर विपक्ष सवाल उठा रहा है. बिहार में यह मामला विपक्षियों का मुद्दा बनता जा रहा है. जदयू महासचिव ने नाम लिए बगैर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर पलटवार किया. मनीष वर्मा ने भागलपुर में एक कार्यक्रम में कहा कि डोमिसालइल मुद्दे पर कुछ लोग कन्फ्यूजन पैदा कर रहे हैं कि कई राज्यों में यह लागू है, जो गलत है. दरअसल आरक्षित सीटों पर नौकरी वहां के स्थानीय नारिकों को ही नौकरी मिलेगी. लेकिन अनारक्षित सीटों पर देश का कोई भी नारिक आवेदन देकर नौकरी ले सकता है. अगर किसी को भ्रम है तो हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के वकील से पूछ ले.

आरक्षित सीट पर ही केवल डोमिसाइल

मनीष वर्मा ने कहा कि यह सुनने में अच्छा लगता है कि बिहार में सिर्फ बिहार के लोग ही काम करें, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि दूसरे राज्यों में भी बड़ी सख्या में बिहार के लोग काम करते हैं. अगर उन्हें रोक दिया जाए तो कैसा लगेगा. मनीष वर्मा ने कहा कि बिहार में पढ़नेवालों की संख्या ज्यादा है और नौकरी कम है. ऐसे में बिहार के युवाओं को दूसरे राज्यों में रोक दिया जाए तो क्या होगा. मनीष वर्मा ने कहा कि हर प्रदेश में बिहारी दिखेंगे. ऐसा इसलिए कि संविधान सभी राज्यों में जाकर आजीविका का अधिकार देता है. राज्य में रहनेवाले किसी दूसरे राज्य के नागरिकों से भेदभाव नहीं किया जा सकता.

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आशीष झा

लेखक के बारे में

By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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