राज्य भर में प्ले स्कूल की तर्ज पर आंगनबाड़ी केंद्रों को विकसित करने की योजना अधर में

Updated at : 07 Jan 2026 1:01 AM (IST)
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राज्य भर में प्ले स्कूल की तर्ज पर आंगनबाड़ी केंद्रों को विकसित करने की योजना अधर में

बिहार में एक लाख 14 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल की तर्ज पर विकसित करने की योजना बीच अधर में लटक गयी है.

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– बच्चों को एक साल से नहीं मिल रही पोषाक की राशि, नयी योजना में जीविका दीदी को बच्चों को देना है पोषाक

संवाददाता, पटना

बिहार में एक लाख 14 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल की तर्ज पर विकसित करने की योजना बीच अधर में लटक गयी है. समाज कल्याण विभाग ने केंद्रों पर आने वाले सभी बच्चे एक जैसे दिखे, इसके लिए जीविका दीदियों के माध्यम से तीन से छह साल के बच्चों को साल में दो पोषाक देने का निर्णय लिया था. जुलाई 2025 में इसको लेकर एक समझौता भी विभाग ने किया, लेकिन अब तक कहीं भी पोषाक का वितरण शुरू नहीं हो पाया है. इस कारण बच्चे घरों से अपने घरेलू ड्रेस में ही आंगनबाड़ी केंद्र पहुंच रहे है. विभागीय अधिकारियों ने बताया कि लगभग एक साल से अधिक समय गुजर चुका है, पोषाक के लिए पैसा नहीं आया है.

42 लाख 67 हजार 770 बच्चों को पोषाक देने की योजना

समाज कल्याण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जीविका दीदी को साल में दो पोषाक बच्चों को देना है. कुल लक्ष्य 42 लाख 67 हजार 770 बच्चों को पोषाक देने की है, जिसमें तीन से छह साल के बच्चे शामिल हैं. इसके बाद भी बच्चों को पोषाक नहीं मिल रहा है.

पहले अभिभावकों के खाते में भेजा जाता था 400 रुपया

आंगाबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को पोषाक देने की जिम्मेदारी सेविका की थी. इसके लिए सेविका को बच्चों की संख्या के मुताबिक 200 रुपया भेजा जाता था. लेकिन सेविका के माध्यम से गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर विभाग ने बच्चों के अभिभावकों के खाते में सीधे 400 रुपया जाने लगा. यह डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों को मिलता था.विभागीय समीक्षा में पाया गया कि अधिकांश बच्चे केंद्रों पर राशि मिलने के बाद भी ड्रेस में नहीं आते थे. इस कारण से 2025 में पोषाक देने की जिम्मेदारी जीविका दीदी को सौंपी गयी. इसके लिए विभाग के निदेशालय के साथ समझौता भी किया गया, लेकिन अबतक तक केंद्र पर आने वाले बच्चों को पोषाक नहीं मिल रहा है.

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Prahlad Kumar

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