Cyber Crime : अमेरिकियों को ठगने के लिए पटना के शातिरों ने बना रखी थी दो टीमें, पुलिस कर रही तलाश

दीघा थाने की पुलिस ने तीन साइबर ठगों को गिरफ्तार किया था, जिसकी निशानदेही पर पाटलिपुत्र थाना क्षेत्र के एक अपार्टमेंट से इंटरनेशनल कॉल सेंटर का खुलासा हुआ था. इस कॉल सेंटर की आड़ में शातिर अमरिकियों से ठगी करते थे और डॉलर से रुपये में बदल अपने खाते में मंगवाते थे.
पटना पुलिस ने जिस इंटरनेशनल कॉल सेंटर का खुलासा किया है, उसी गिरोह की एक और टीम द्वारा भी अमेरिकियों को ठगने की बात सामने आ रही है. पटना पुलिस अब दूसरी टीम की तलाश में जुट गयी है. यह जानकारी सिटी एसपी सेंट्रल अंबरीष राहुल ने दी है. उन्होंने बताया कि दूसरे ग्रुप के सदस्यों का भी सरगना भी मनेर का पिंटू है. फिलहाल पिंटू की तलाश में पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है.
मालूम हो कि दीघा थाने की पुलिस ने तीन साइबर ठगों को गिरफ्तार किया था, जिसकी निशानदेही पर पाटलिपुत्र थाना क्षेत्र के एक अपार्टमेंट से इंटरनेशनल कॉल सेंटर का खुलासा हुआ था. इस कॉल सेंटर की आड़ में शातिर अमरिकियों से ठगी करते थे और डॉलर से रुपये में बदल अपने खाते में मंगवाते थे. इस गिरोह के करीब आधा दर्जन लोग अमेरिका में इस गिरोह के लिए काम कर रहे हैं.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तीनों दानिश अरशद, आमिर सिद्दकी और सब्बीर अहमद पहले एक कॉल सेंटर में काम करते थे. इसी दौरान अमेरिका के कई भारतीय मूल के लोगों से जान-पहचान हुई. कॉल सेंटर से कैसे-कैसे लोगों की मदद आती है और वहां कौन-कौन से बड़ी कंपनियों को लोग मदद के लिए ढूंढ़ते हैं, इसका पता लगाया. बताया जा रहा है कि कॉल सेंटर के बारे में तीनों को पूरी जानकारी थी और अमेरिका में रह रहे लोगों के संपर्क में आने के बाद पिंटू समेत गिरोह के अन्य लोगों ने प्लान बनाकर कॉल सेंटर खोल लिया.
सिटी एसपी सेंट्रल ने बताया कि गिरोह का कोई भी सदस्य किसी के असली नाम को नहीं जानता है. जिन तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई और जब उनसे पूछताछ की गयी, तो दूसरी टीम के किसी भी सदस्य का नाम असली नहीं बताया. गिरफ्तार शातिरों ने कहा कि गिरोह में फ्रैंक, जॉन, अल्बर्ट और थॉमस नाम से कई और लोग हैं. इस नाम पर शातिरों ने अपना परिचय पत्र भी बना रखा था.
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सिटी एसपी ने इओयू को गिरोह के सभी सदस्यों की संपत्ति की जांच करने को लेकर पत्र लिखा है. सूत्र बताते हैं कि ये सभी डॉलर को रुपये में बदल उससे संपत्ति बना रहे थे. वहीं गिरोह के सदस्यों पर हवाला करने का भी आरोप लग सकता है. पुलिस ने बताया कि इस गिरोह के बैंक डिटेल और पिछले कई सालों का ट्रांजेक्शन बैंक से मांगा गया है.
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