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सीआइडी खड़ा कर रहा है विशेष खोजी दस्ते की फौज

Updated at : 08 Mar 2020 4:55 AM (IST)
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सीआइडी खड़ा कर रहा है विशेष खोजी दस्ते  की फौज

वारदात स्थल पर अपराधी द्वारा छोड़े गये सबूत को सूंघकर उसे गिरफ्तार करा देने वाले विशेष खोजी दस्तों की फौज तैयार किया जा रहा है. श्वान दस्ते में 50 यूनिट गठित करने का प्रस्ताव को गृह विभाग ने मंजूरी दे दी है.

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पटना : वारदात स्थल पर अपराधी द्वारा छोड़े गये सबूत को सूंघकर उसे गिरफ्तार करा देने वाले विशेष खोजी दस्तों की फौज तैयार किया जा रहा है. श्वान दस्ते में 50 यूनिट गठित करने का प्रस्ताव को गृह विभाग ने मंजूरी दे दी है. जून तक 25 श्वान की खरीद की प्रक्रिया भी पूरी हो जायेगी. राज्य के सभी जिलों में श्वान दस्ते की सेवा उपलब्ध कराने के लिए 50 यूनिट का प्रस्ताव तैयार किया था. इसके लिए 200 श्वान की खरीद के साथ ही डीएसपी से लेकर सिपाही रैंक के 663 पदों के सृजन का प्रस्ताव पिछले वर्ष ही गृह विभाग को भेजा गया था.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रस्ताव को गृह विभाग से मंजूरी मिलने के बाद श्वान और संसाधन खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. पहली खेप में 25 श्वान की खरीद होगी. विभिन्न प्रजाति के इन श्वान को हैदराबाद आदि जगहों पर स्पेशल ट्रेनिंग दिलायी जायेगी. चार श्वान वाले एक यूनिट में ट्रैकर व माइंस डिटेक्टिव के साथ ही शराब खोजने वाले श्वान भी होंगे. सूत्रों के अनुसार इस परियोजना के पूरी होने पर पुलिस के बजट पर सालाना 60 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि होगी. इससे पूर्व 2013 में आर्मी ट्रेनिंग सेंटर मेरठ से 15 , वर्ष 2014 में 45 डॉग खरीदे थे. 2019 में तेलंगाना पुलिस से 20 ट्रेंड डॉग खरीदे थे.

अभी 11 यूनिट तैनात: वर्तमान में सीआइडी में 11 यूनिट हैं. इन पर करीब 17 करोड़ रुपये सालाना खर्च हो रहे हैं. एक डीएसपी, छह दारोगा, 13 एएसआइ, 12 हवलदार, 116 सिपाही नियुक्त हैं. सिपाही – हवलदार रैंक के पुलिसकर्मी हैंडलर- सहायक हैंडलर हैं. 12 कुक कम स्वीपर तैनात हैं.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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