Video: सोनपुर मेले में 1 करोड़ का ‘प्रधान बाबू’ बना सुर्खियों का सितारा, अनोखी खूबियों वाले भैंसे ने सोशल मीडिया पर मचाई धूम
Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 24 Nov 2025 11:06 AM
अपने मालिक के साथ प्रधान बाबू
Sonpur Mela 2025: एशिया प्रसिद्ध सोनपुर मेला 2025 में इस बार एक भैंसा सबका ध्यान खींच रहा है. रोहतास जिले से आया करीब एक करोड़ रुपये कीमत वाला ‘प्रधान बाबू’ मेला घूमने वालों के बीच सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है.
Sonpur Mela 2025: हरिहर क्षेत्र सोनपुर का यह ऐतिहासिक पशु मेला कभी दुनिया का सबसे बड़ा पशु बाजार माना जाता था. घोड़े, ऊंट, हाथी, बैल, गाय, भैंस हर तरह के पशुओं की भारी खरीद-बिक्री यहां होती थी. लेकिन समय के साथ नए नियम कानून, आधुनिकता और व्यापार के तरीकों में बदलाव आया और मेला धीरे-धीरे अपनी पुरानी पहचान खोने लगा.
अब मेला मनोरंजन, झूले, खाने-पीने और कपड़े के स्टॉल, खाद्य दुकानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पर्यटन केंद्र के रूप में ज्यादा जाना जाता है. पशुओं की बिक्री बहुत कम रह गई है. फिर भी कुछ पशुपालक ऐसे हैं, जो इस मेले की पुरानी विरासत को जिंदा रखे हुए हैं. इन्हीं में से एक हैं ‘प्रधान बाबू’.
‘प्रधान बाबू’ बना सोनपुर मेले का सुपरस्टार
मेला में लगे एक बड़े बैनर पर जब इस भैंसे की कीमत देख लोग रुकते हैं, तो उसी समय भीड़ इकट्ठी हो जाती है. हर कोई इसे देखने, छूने और इसके साथ फोटो या सेल्फी लेने में लगा है. सोशल मीडिया पर भी ‘प्रधान बाबू’ की तस्वीर और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं.
भैंसा के मालिक बीरबल कुमार सिंह हैं. जो रोहतास के रहने वाले हैं. उन्होंने बताया कि यह जाफराबादी नस्ल का भैंसा है और सिर्फ 38 महीने का है. इसकी लंबाई लगभग 8 फीट और ऊंचाई करीब 5 फीट है. चमकदार काला रंग इसे और भी आकर्षक बनाता है. उन्होंने आगे बताया कि रोजाना इसके चारे पर करीब 2,000 रुपये खर्च होते हैं. इसकी कीमत एक करोड़ रुपये है. खास खाना, नियमित देखभाल और कड़ी दिनचर्या के कारण यह भैंसा लोगों का चहेता बन गया है.
मांग तो बहुत, खरीदार अभी नहीं
बीरबल कुमार सिंह बताते हैं कि अब तक कोई खरीदार सामने नहीं आया है, लेकिन कई लोग फोन पर इसकी कीमत पूछ चुके हैं. कई ऐसे लोग भी हैं जो सिर्फ इसे देखने ही आते हैं और कहते हैं- ऐसा भैंसा पहली बार देखा.
पुरानी विरासत को जिंदा रखे हैं ‘प्रधान बाबू’
सोनपुर मेला भले ही अब पहले जैसा पशु बाजार न रहा हो, लेकिन ‘प्रधान बाबू’ जैसे आकर्षण इस मेले की पहचान को जिंदा रखे हुए हैं. लोगों को उम्मीद है कि ऐसे प्रयासों से एक दिन यह मेला फिर अपने पुराने गौरव को वापस पा सकता है.
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By Abhinandan Pandey
अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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