ISRO लगाएगा चंपारण-भागलपुर में रडार, बाढ़-बिजली की चेतावनी मिलेगी पहले

Doppler Weather Radar
Bihar News: बिहार में मौसम और आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए, इसरो पश्चिम चंपारण और भागलपुर में डॉप्लर वेदर रडार लगाने जा रहा है. यह पहल न सिर्फ नेपाल से आने वाली बाढ़ की निगरानी बेहतर करेगी, बल्कि बिजली गिरने जैसी घटनाओं की अग्रिम चेतावनी भी संभव बनाएगी.
Bihar News: बिहार में कुदरत के कहर और मौसम की अनिश्चितता से निपटने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है. अब राज्य के चंपारण और भागलपुर जिलों में अत्याधुनिक डॉप्लर वेदर रडार लगाए जाएंगे.
अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC) के निदेशक नीलेश एम. देसाई ने पटना में इसका एलान करते हुए बताया कि इन रडार की मदद से न केवल बाढ़ और चक्रवात, बल्कि जानलेवा बिजली गिरने की सटीक जानकारी भी एक से दो घंटे पहले मिल सकेगी. बिहार के लिए यह तकनीक किसी जीवनदान से कम नहीं होगी, क्योंकि यहा हर साल आकाशीय बिजली गिरने से सैकड़ों लोगों की जान जाती है.
बिहार में हाईटेक मौसम निगरानी की तैयारी
नीलेश एम. देसाई ने पटना में आयोजित एक व्याख्यान में बताया कि नए रडार से मौसम की सटीक जानकारी पहले से कहीं ज्यादा तेज और भरोसेमंद तरीके से मिल सकेगी.
इन रडारों के लगने से उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों को विशेष लाभ मिलेगा. नेपाल में भारी बारिश या जलस्तर बढ़ने की स्थिति में बिहार प्रशासन को तुरंत संकेत मिल सकेंगे, जिससे समय रहते राहत और बचाव की तैयारी हो सकेगी.
बिजली गिरने की चेतावनी भी पहले
इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आने वाले समय में एक-दो घंटे पहले बिजली गिरने की चेतावनी जारी की जा सकेगी. राज्य के ग्रामीण और खेतों में काम करने वाले लोगों के लिए यह जीवनरक्षक साबित हो सकता है.
इसरो और बिहार मौसम सेवा केंद्र मिलकर पिछले तीन वर्षों से इस दिशा में काम कर रहे हैं. अब रडार लगने के बाद यह सहयोग और मजबूत होगा.
त्योहारों और भीड़ प्रबंधन में भी मदद
अंतरिक्ष तकनीक का इस्तेमाल केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा. बड़े आयोजनों और त्योहारों में भीड़ नियंत्रण के लिए भी सैटेलाइट आधारित डेटा का उपयोग किया जाएगा. इससे प्रशासन को भीड़ के मूवमेंट और संभावित जोखिम का आकलन करने में मदद मिलेगी.
पटना में आयोजित कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि यह पहल विकसित देशों से प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और विकास के लिए की जा रही है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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