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झारखंड,यूपी समेत आठ राज्यों से कम है बिहार के पानी में फ्लोराइड

झारखंड,यूपी समेत आठ राज्यों से कम है बिहार के पानी में फ्लोराइड

बिहार में भूजल की गुणवत्ता दूसरे राज्यों की तुलना में बेहतर, फ्लोराइड का दायरा घटा – पीएचइडी की चुनौती बढ़ी, नये जिलों में भूजल प्रदूषित प्रह्लाद कुमार देश के अन्य राज्यों की तुलना में बिहार में पानी अब भी बेहतर स्थिति में है. भूजल में फ्लोराइड की मौजूदगी यूपी के 27 जिलों, झारखंड के आठ जिलों, राजस्थान के 31, गुजरात के 25, तेलंगाना के 28, तमिलनाडु के 21 जिलों में है. वहीं, बिहार में महज छह जिलों में फ्लोराइड है. साथ ही, सैलेनिटी की समस्या आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश में बहुत है, लेकिन बिहार की बात करें, तो यहां पानी में खारापन की स्थिति में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं है. केंद्रीय भूजल आयोग की इस रिपोर्ट के अनुसार आर्सेनिक प्रभावित जिलों में बिहार, उत्तर प्रदेश के बाद दूसरा राज्य है. बिहार के 20 जिलों के भूजल में आर्सेनिक की मात्रा अनुमान्य सीमा से काफी अधिक है. वहीं, यूरेनियम की उपस्थिति केवल सीवान में मिला है. बिहार सरकार के दिशा-निर्देश पर गुणवत्ता प्रभावित इलाकों में रहने वाले परिवारों को पानी से हो रही बीमारियों से बचाने के लिए पीएचइडी लगातार हर घर नल का जल पहुंचाने में जुटा है. पीएचइडी की बढ़ी चुनौती, भूजल में नाइट्रेट, क्लोराईड, यूरेनियम ने दी दस्तक पीएचइडी के मुताबिक राज्य के 30,207 ग्रामीण वार्डों के भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड, आयरन अनुमान्य सीमा से अधिक है. बावजूद इसके इसे जल शुद्धिकरण संयंत्र लगा कर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया है, साथ ही, भूजल में नाइट्रेट, क्लोराईड, यूरेनियम, सैलेनिटी (खारापन) के नई चुनौती के रूप में दस्तक दी है. आयरन की चुनौती 10 जिलों तक ही नहीं 33 जिलों में पहुंची है. वहीं, फ्लोराइड का दायरा घटा है. फ्लोराइड मात्र छह जिलों, बांका, गया, जमुई, नालंदा, नवादा, शेखपुरा में ही रिपोर्ट हुए हैं. आर्सेनिक गंगा नदी के समीप वाले जिलों से आगे बढ़कर अररिया, पूर्वी चम्पारण, गोपालगंज, किशनगंज, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल, पश्चिम चंपारण में भी रिपोर्ट हुए हैं. जिसको लेकर पीएचइडी ने नये सिरे से नीति बनाने का निर्देश अधिकारियों को दिया है. तेजी से बढ़ते भूजल संक्रमण को रोकने के लिए यह समेकित प्रयास जरूरी – पीएचइडी द्वारा 123 जल जांच प्रयोगशाला चलाए जा रहे हैं, लेकिन अधिकांश पद खाली रहने के कारण जल जांच कम हो रहे हैं. शहरी जलापूर्ति व्यवस्था के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग के पास की लैब नहीं है. – समुदाय स्तर पर फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से पेयजल गुणवत्ता की निगरानी जरुरी है. इसके लिए पीएचइडी ने किट खरीदने के लिए निविदा जारी की गई है. – कृषि में जैविक खाद को प्रोत्साहन देने के लिए काम किया जायेगा. – कचरा जल प्रबंधन और मल प्रबंधन के लिए नयी नीति बनायी जायेगी, ताकि दूषित पानी का क्षेत्र में बढ़ोतरी नहीं हो.

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Prabhat Khabar News Desk
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