'मगध का हिमालय' कहलाता है बिहार का ये पहाड़! सम्राट अशोक ने खुद करवाया था गुफाओं का निर्माण, जानिए इसकी खासियत

Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 31 Jul 2025 3:02 PM

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पर्वत की तस्वीर

Bihar Tourist Places: बिहार के जहानाबाद जिले में स्थित वाणावर पर्वत, जिसे 'मगध का हिमालय' और 'बराबर पहाड़' के नाम से भी जाना जाता है. करीब 100 फीट ऊंची इस पर्वत श्रृंखला पर स्थित सिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर न सिर्फ श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां मौजूद अशोककालीन शिलालेख और प्राचीन गुफाएं इसे ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद खास बनाती हैं.

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Bihar Tourist Places: (जयश्री आनंद) बिहार की धरती इतिहास, आस्था और प्रकृति का अनोखा मेल है. जहानाबाद का वाणावर पर्वत इसका जीता-जागता उदाहरण है. जिसे स्थानीय लोग ‘बराबर पहाड़’ के नाम से भी जानते हैं. यह पर्वत बिहार के पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभरती एक महत्वपूर्ण पहचान बनती जा रही है. मगध का हिमालय’ कहे जाने वाले इस पहाड़ी क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किया जा सकता है.

करीब 100 फीट ऊंचे इस पर्वत की चोटी पर स्थित है सिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर, जिसे देश के प्राचीनतम शिव मंदिरों में से एक माना जाता है. यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि इतिहास प्रेमियों के लिए भी एक अनमोल धरोहर है. सालों भर यहां भक्त जल अर्पित करने के लिए पहुंचते हैं.

अशोक काल के शिलालेख है मौजूद

इतना ही नहीं, वाणावर पर्वत के शिलाखंडों पर सम्राट अशोक के काल के शिलालेख आज भी मौजूद हैं, जो उस युग की सांस्कृतिक विरासत की कहानी बयां करते हैं. इन शिलालेखों को देखकर इतिहासकारों और पर्यटकों को मगध साम्राज्य की झलक मिलती है.

प्राचीन गुफाओं का अद्भुत नजारा

जहानाबाद की बराबर पहाड़ियों में कुल सात प्राचीन गुफाएं हैं, जिनमें चार बराबर पर्वत पर और तीन नागार्जुन की पहाड़ियों में स्थित हैं. इन गुफाओं को हजारों साल पहले बड़ी बारीकी से तराशा गया था. यहां के कई गुफाओं की दीवारें इतनी चिकनी हैं कि आज की टाइल्स भी फीकी लगे.

राजा जरासंध से जुड़ा है सिद्धनाथ मंदिर

बाबा सिद्धनाथ मंदिर का निर्माण सातवीं शताब्दी में, गुप्त काल के दौरान हुआ था. मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर को राजगीर के प्रसिद्ध राजा जरासंध ने बनवाया था. कहा जाता है कि मंदिर से एक गुप्त रास्ता राजगीर किले तक जाता था. राजा इसी रास्ते से मंदिर में पूजा करने आते थे.

कैसे पहुंचें वाणावर?

पटना से वाणावर सड़क मार्ग के ज़रिए लगभग दो से तीन घंटे में पहुंचा जा सकता है. इसके लिए पटना-गया नेशनल हाईवे (NH-83) से मखदुमपुर तक जाएं. यहां जमुने नदी का पुल पार करते ही एक सड़क पूरब दिशा में जाती है, जो सीधे वाणावर तक पहुंचती है. इसके अलावा अगर आप ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं तो बराबर हाल्ट स्टेशन पर उतरें. वहां से सवारी गाड़ियों की मदद से आसानी से वाणावर पहुंचा जा सकता है.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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