Bihar Politics: बिहार की सियासत में मकर संक्रांति के पहले ही हलचल तेज हो गई है. ऐसे में आज कांग्रेस की तरफ से दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया था, जिसे लेकर कई तरह की चर्चा तेज हो गई है. दरअसल, इस भोज में महागठबंधन के किसी भी घटक दल को न्योता नहीं दिया गया था. कांग्रेस के विधायक भी नदारद रहे. एक-दो पूर्व विधायकों की मौजदूगी रही. ऐसे में कयासों का सिलसिला तेज हो गया है.
प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम का बड़ा बयान
आज दही-चूड़ा भोज में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के पहुंचते ही जब पत्रकारों की तरफ से सवाल किया गया कि घटक दलों को न्योता नहीं दिया गया और कोई एमएलए भी शामिल नहीं हुए. इस पर वे गोल-मटोल जवाब देते दिखे. इतना ही नहीं, उन्होंने सीधा बीजेपी पर निशाना साधना शुरू कर दिया. राजेश राम ने कहा, ऐसे मौके पर राजनीति नहीं होती. धर्म के आधार पर सियासत बीजेपी करती है. कांग्रेस कभी भी धर्म को लेकर राजनीति नहीं करती है.
संगठन को लेकर क्या बोले राजेश राम?
इस दौरान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने पार्टी को लेकर भी बड़ा दिया. दरअसल उन्होंने कहा, दही-चूड़ा भोज के बाद पार्टी और संगठन को मजबूत करने के लिए नए निर्णय लेंगे. इस तरह से राजेश राम के बयान के बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. बिहार की सियासत में खरमास बाद बड़ा उलटफेर होने की चर्चा तेज हो गई है. इस दौरान राजेश राम ने मकर संक्रांति के पर्व के महत्व को भी बताया.
बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा का खास महत्व
बिहार की सियासत में दही-चूड़ा का भोज बेहद ही खास माना जाता है. कई राजनीतिक नेताओं की तरफ से भोज का आयोजन किया जाता है. इस मौके पर कई राजनीतिक रिश्ते बनते और बिगड़ते हैं. अब तक की बात करें तो, तेज प्रताप यादव, चिराग पासवान के अलावा कई अन्य नेताओं की तरफ से दही-चूड़ा भोज का आमंत्रण दिया जा रहा है. ऐसे में खरमास बाद किस तरह के सियासी बदलाव होते हैं, यह देखना रोचक होगा.

