Bihar News: ड्रोन से डंप साइट पर जमा कचरे का अध्ययन करेंगी छह एजेंसियां, विभाग को रिपोर्ट करेगी चयनित एजेंसी

Published by : Radheshyam Kushwaha Updated At : 09 Feb 2025 3:53 AM

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सांकेतिक तस्वीर

Bihar News: डंप साइटों के सर्वेक्षण के उपरांत उपलब्ध कचरे की मात्रा के हिसाब से नगर विकास एवं आवास विभाग उसकी प्रोसेसिंग कर नष्ट किये जाने या पुन: इस्तेमाल को लेकर योजना बनायेगी.

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Bihar News: पटना. बिहार के सभी 19 नगर निगम सहित 45 नगर निकायों में डंप साइट पर बने कचरों के पहाड़ (लिगेसी वेस्ट) का सर्वे कर उसका अध्ययन होगा. सर्वे के आधार पर लिगेसी वेस्ट के उपचार व उसके निस्तारण को लेकर आवश्यक प्रोसेसिंग इकाइयां लगायी जायेंगी. नगर विकास एवं आवास विभाग ने इसको लेकर तकनीकी रूप से सक्षम और अनुभवी छह एजेंसियों का चयन करते हुए उनको जिम्मेदारी सौंप दी है. इसका उद्देश्य इन डंप साइटों का स्थानीय पर्यावरण पर पड़ रहे असर को समझना और उसे दूर करना है.

मात्रा का आकलन कर विभाग को रिपोर्ट करेगी चयनित एजेंसी

मिली जानकारी के मुताबिक चयनित एजेंसी ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से अपशिष्ट की मात्रा का आकलन कर विभाग को रिपोर्ट करेगी. साथ ही इस कचरे के निबटान को लेकर अपना सुझाव देंगी. डंप साइटों के सर्वेक्षण के उपरांत उपलब्ध कचरे की मात्रा के हिसाब से नगर विकास एवं आवास विभाग उसकी प्रोसेसिंग कर नष्ट किये जाने या पुन: इस्तेमाल को लेकर योजना बनायेगी. डंप साइट से रिसाइकल होने वाली सामग्रियों यथा प्लास्टिक आदि को निकाल कर उसका पुन: इस्तेमाल हो सकेगा, जबकि प्रोसेसिंग के बाद बचे सूखे कचरे का इस्तेमाल खाद बनाने के साथ ही गड्ढे वाले क्षेत्रों को भरने के लिए किया जा सकेगा.

अलग अलग रखने पर परेशानी होगी कम

पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक डंप साइटों पर वर्षों से फेंके जा रहे कचरों में जैविक, औद्योगिक और नष्ट न होने वाली सामग्रियों का मिश्रण होता है. यह पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ाता है. लैंडफिल स्थल मिट्टी और भूजल के प्रदूषण के लिए भी जिम्मेदार होते हैं. संग्रहित कचरे में सीसा और पारा जैसे भारी पदार्थ आसपास की मिट्टी और पानी में फैल जाता है. वहीं, लैंडफिल साइटों से निकलने वाले कचरे से उत्पन्न मीथेन कभी-कभी विस्फोट और आग का कारण बन जाता है. यह पक्षियों के प्रवास पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है. लैंडफिल साइटों से भोजन प्राप्त करते वाले पक्षी प्लास्टिक, एल्युमिनियम, जिप्सम और अन्य सामग्री निगल जाते हैं, जो घातक साबित हो सकते हैं.

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.

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