पटना-सासाराम फोरलेन की हदबंदी शुरू होते ही गांवों में भारी आक्रोश; आमने-सामने आए किसान और अधिकारी

Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 23 May 2026 10:01 PM

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फोर लाने लिए चिन्हित जमीन

Bihar News: पटना-सासाराम फोरलेन सड़क निर्माण के लिए बिहटा प्रखंड के अमहारा, कंचनपुर और यमुनापुर समेत कई गांवों में 140 फीट की चौड़ाई में जमीन का डिमार्केशन शुरू कर दिया गया है. इसके विरोध में स्थानीय किसानों ने मोर्चा खोल दिया है. किसानों का आरोप है कि उचित कानूनी प्रक्रिया और मुआवजे के भुगतान के बिना ही सीमांकन किया जा रहा है, और तय राशि बाजार मूल्य से काफी कम है. वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि मुआवजा सरकारी गाइडलाइन के तहत ही तय हो रहा है और विवाद सुलझाने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे.

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Bihar News(मोनु कुमार मिश्रा): सासाराम-पटना फोरलेन सड़क निर्माण परियोजना के धरातल पर उतरने के साथ ही प्रभावित ग्रामीण इलाकों में भारी हलचल और विरोध की स्थिति उत्पन्न हो गई है. परियोजना के तहत 140 फीट की तय चौड़ाई में सड़क के दोनों ओर जमीन का डिमार्केशन (सीमांकन) कार्य प्रशासनिक स्तर पर शुरू कर दिया गया है. हालांकि, अधिग्रहित होने वाली जमीनों के मालिकों और किसानों ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. किसानों का सीधा आरोप है कि प्रशासन बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए और बिना मुआवजा भुगतान किए ही जबरन सीमांकन कर रहा है, जिससे गांवों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है.

बिहटा के कई गांवों में पहुंचा राजस्व विभाग, उपजाऊ जमीन जाने से किसान चिंतित

जानकारी के अनुसार, बिहटा प्रखंड के अमहारा, कंचनपुर, यमुनापुर समेत कई चिन्हित गांवों में राजस्व विभाग की विशेष टीम द्वारा भारी पुलिस बल की निगरानी में जमीन की नापी और सीमांकन का काम किया जा रहा है. एक तरफ जहां इस सड़क निर्माण परियोजना को क्षेत्र के विकास, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुगम यातायात व्यवस्था के बड़े विकल्प के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जिन किसानों की पुश्तैनी और उपजाऊ जमीनें इसके दायरे में आ रही हैं, वे उचित मुआवजे की मांग को लेकर अड़ गए हैं. आंदोलन रुख अख्तियार कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन द्वारा जो मुआवजा राशि निर्धारित की जा रही है, वह वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना में ऊंट के मुंह में जीरा के समान यानी बेहद कम है. किसानों का दर्द है कि उनकी एकमात्र कमाऊ और उपजाऊ थ्री-क्रॉप जमीन अधिग्रहित की जा रही है, जिससे भविष्य में उनके सामने आजीविका और पेट भरने का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा. कई स्थानों पर ग्रामीणों ने एकजुट होकर काम को रुकवाया और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी तीखी आपत्ति दर्ज कराई है.

प्रशासन का पक्ष: गाइडलाइन के अनुसार मिल रहा पैसा, संवाद के लिए लगेंगे विशेष शिविर

इस पूरे जमीनी विवाद और किसानों के हंगामे को लेकर जब प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने किसानों के आरोपों को सिरे से खारिज किया. अधिकारियों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजे का निर्धारण पूरी तरह से सरकारी गाइडलाइन, सर्किल रेट और तय नियमों के अनुरूप ही किया जा रहा है. किसी के साथ अन्याय नहीं होगा. प्रभावित भू-स्वामियों और किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान तथा भ्रांतियों को दूर करने के लिए प्रभावित अंचलों में बहुत जल्द विशेष ‘संवाद एवं समाधान शिविर’ लगाए जाएंगे. अधिकारियों ने जोर देते हुए कहा कि इस महात्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य राजधानी पटना और सासाराम के बीच के सफर को बेहद तेज और सुगम बनाना है, जिससे न सिर्फ समय की बचत होगी बल्कि दक्षिण बिहार में व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियों को भी भारी रफ्तार मिलेगी.

प्रशासन ने कहा, बातचीत से निकलेगा रास्ता, काम रहेगा जारी

इधर, प्रभावित किसानों और प्रबुद्ध ग्रामीणों का दोटूक कहना है कि वे क्षेत्र के विकास के विरोधी नहीं हैं. फोरलेन बनना बेहद जरूरी है, लेकिन विकास की इस वेदी पर अन्नदाताओं और गरीब किसानों के हितों की क्रूर अनदेखी नहीं की जानी चाहिए. सरकार को जमीन के बदले जमीन या फिर बाजार दर का चार गुना उचित मुआवजा सुनिश्चित करना ही होगा. फिलहाल, तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए अनुमंडल प्रशासन ने दावा किया है कि किसानों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए बीच का रास्ता निकालने का प्रयास जारी है, ताकि महत्वाकांक्षी सड़क निर्माण कार्य बिना किसी व्यवधान के शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ सके.

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