आपके पास है पुराना खतियान तो सरकार को दें, स्कैनिंग के बाद सुरक्षित मिल जाएगी ओरिजिनल कॉपी

Edited by Paritosh Shahi
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राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल

Bihar Land Survey: बिहार के 9334 गांवों का सदियों पुराना कैडेस्टल सर्वे खतियान गायब या फट चुका है. विशेष भूमि सर्वे को पूरा करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने रैयतों से मदद मांगी है. सरकार ने अपील की है कि लोग अपने खतियान की कॉपी सर्किल ऑफिस को सौंपें.

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Bihar Land Survey: बिहार में चल रहे भूमि सर्वेक्षण के बीच पता चला है कि 9 हजार से अधिक गांवों का कैडेस्टल सर्वे वाला खतियान या तो सरकारी रिकॉर्ड रूम से गायब है या फिर पूरी तरह फट चुका है. इस समस्या से निपटने और जमीन सर्वे को समय पर पूरा करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अब रैयतों से सहयोग की अपील की है. विभाग का कहना है कि जिला राजस्व अभिलेखागारों में यह बेहद जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण जमीन के मालिकाना हक को तय करने में दिक्कत आ रही है.

कुछ समय के लिए दें अपना खतियान, सुरक्षित लौटेगी कॉपी- विभाग

राजस्व विभाग ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा है कि अगर किसी भी परिवार के पास अपने गांव या जमीन का कैडेस्टल सर्वे खतियान सुरक्षित उपलब्ध है, तो उसे कुछ समय के लिए अपने अंचल कार्यालय या राजस्व अभिलेखागार में जमा करा दें. सरकार ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि उनके दस्तावेज का पूरा सम्मान और संरक्षण किया जाएगा. विभाग सिर्फ इसकी स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन करेगा और डिजिटल कॉपी तैयार होते ही ओरिजिनल कॉपी सुरक्षित रूप से रैयत को वापस लौटा दी जाएगी.

बाढ़ प्रभावित जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान

बिहार में कैडेस्टल सर्वे का काम साल 1900 से 1910 के बीच हुआ था. आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल गांवों या मौजों की संख्या 45103 है, जिनमें से 9334 गांवों के कैडेस्टल खतियान अनुपलब्ध या नष्ट हो चुके हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि राज्य के करीब 20 फीसदी गांवों का पुराना भूमि रिकॉर्ड सरकारी दफ्तरों में नहीं है.

सहरसा, पूर्णिया, अररिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण ऐसे जिले हैं, जहां के दो सौ से अधिक गांवों के खतियान गायब हैं. इनमें से ज्यादातर वो इलाके हैं जो हर साल भीषण बाढ़ का सामना करते हैं, और माना जा रहा है कि बाढ़ के पानी और नमी के कारण ही ये सरकारी दस्तावेज नष्ट हुए हैं.

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विशेष भूमि सर्वे में मिलेगी मदद

अधिकारियों का कहना है कि अगर लोगों के सहयोग से ये पुराने खतियान मिल जाते हैं, तो वर्तमान में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण के दौरान जमीन के असली मालिक का निर्धारण करने और सीमाओं को तय करने में बहुत बड़ी सुविधा होगी. कैडेस्टल सर्वे के बाद राज्य में 1952 से 1960 के बीच रिविजनल सर्वे हुआ था और 1967 में भी एक छिटपुट कोशिश की गई थी, लेकिन वह रफ्तार नहीं पकड़ सकी थी.

इस समय पूरे बिहार में बड़े पैमाने पर विशेष भूमि सर्वेक्षण का काम चल रहा है. राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने दावा किया है कि इस काम में तेजी लाई जा रही है और अगले साल यानी मार्च तक पूरे राज्य में भूमि सर्वे की प्रक्रिया को हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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