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Bihar Elections 2025: दूसरे चरण में सीमांचल से शाहाबाद तक एनडीए की अग्निपरीक्षा, 26 सीटों पर पिछली बार एक भी जीत नहीं मिली थी

Updated at : 08 Nov 2025 9:37 AM (IST)
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Bihar Elections 2025

Bihar Elections 2025

Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की 61 सीटों पर मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों का नहीं, बल्कि साख और रणनीति का भी है क्योंकि यही वे इलाके हैं, जहां 2020 में एनडीए की स्थिति कमजोर थी और महागठबंधन ने लगभग आधा बिहार अपने कब्जे में ले लिया था.

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Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होना है. इस चरण में राज्य के 11 जिलों की 61 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, जिनमें सीमांचल के 4, मगध के 5 और शाहाबाद के 2 जिले शामिल हैं. यह चरण एनडीए के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है, क्योंकि पिछले चुनाव (2020) में इन इलाकों में एनडीए का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था. तब 61 सीटों में से महागठबंधन ने 42, एनडीए ने 18 और एआईएमआईएम ने 1 सीट जीती थी.

सीमांचल: पिछली बार एनडीए का ‘नो एंट्री जोन’

सीमांचल के चार जिलों किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और अररिया में कुल 24 विधानसभा सीटें हैं. 2020 में इन सीटों पर महागठबंधन और एआईएमआईएम ने लगभग पूरी बाजी मार ली थी. किशनगंज की चारों सीटों में एनडीए का खाता तक नहीं खुला था. वहीं, एआईएमआईएम ने सीमांचल में पांच सीटें जीतकर मुस्लिम बहुल इलाकों में मजबूत उपस्थिति दर्ज की थी. बाद में उसके चार विधायक राजद में शामिल हो गए, जिससे महागठबंधन की ताकत और बढ़ गई.
इस बार सीमांचल में भाजपा और जदयू दोनों ने एआईएमआईएम और राजद को कड़ी चुनौती देने की तैयारी की है, लेकिन 2020 का रिकॉर्ड बताता है कि यहां जातीय और धार्मिक समीकरण एनडीए के लिए कठिन राह बना सकते हैं.

मगध: 26 सीटों में से 20 पर महागठबंधन का कब्जा

मगध क्षेत्र, यानी गया, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद और नवादा के 26 विधानसभा क्षेत्रों में पिछली बार एनडीए का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा. इन 26 सीटों में एनडीए को मात्र 6 सीटें मिलीं, जबकि महागठबंधन ने 20 सीटें जीतीं. सबसे खराब स्थिति अरवल, जहानाबाद और औरंगाबाद में रही, जहां एनडीए को एक भी सीट नहीं मिली थी. गया जिले की दस सीटों में एनडीए और महागठबंधन ने पांच-पांच सीटें बांट ली थीं. हालांकि बाद में उपचुनाव में बेलागंज सीट जदयू ने राजद से छीन ली थी, जिससे थोड़ा संतुलन बहाल हुआ.

शाहाबाद: रोहतास और कैमूर बने ‘महागठबंधन किला’

शाहाबाद इलाके के दो प्रमुख जिले रोहतास और कैमूर में भी पिछली बार एनडीए का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था. 2020 के चुनाव में रोहतास की सभी 7 सीटों पर महागठबंधन ने जीत दर्ज की थी, जबकि कैमूर की चार में से तीन सीटों पर भी उसका कब्जा रहा. बसपा ने यहां एक सीट जीती थी, लेकिन उसके विधायक जमा खान बाद में जदयू में शामिल होकर मंत्री बन गए.
अब जब 11 नवंबर को इन जिलों में मतदान होना है, तो नीतीश कुमार और भाजपा नेतृत्व दोनों के लिए यह क्षेत्र प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. एनडीए इस बार शाहाबाद के इस “महागठबंधन किले” में सेंध लगाने की हरसंभव कोशिश में जुटा है.

पहले चरण में नहीं होगा दोबारा मतदान

पहले चरण की वोटिंग (6 नवंबर) के बाद कुछ शिकायतें जरूर सामने आई थीं, लेकिन निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि कहीं भी दोबारा मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी. आयोग के उप निदेशक पी. पवन के अनुसार, 121 विधानसभा क्षेत्रों में हुई वोटिंग के दस्तावेजों खासकर फॉर्म 17ए की जांच में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई. इससे आयोग ने साफ संकेत दे दिया है कि अब पूरा ध्यान दूसरे चरण पर केंद्रित रहेगा, जहां राजनीतिक समीकरणों के साथ एनडीए और महागठबंधन दोनों की भविष्य की रणनीति तय होनी है.

Bihar Elections 2025

दूसरा चरण तय करेगा चुनाव की दिशा

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो दूसरे चरण के नतीजे बिहार चुनाव का रुख तय करेंगे. सीमांचल और मगध जैसे इलाके जहां 2020 में महागठबंधन के गढ़ बने, वहीं इस बार एनडीए के लिए यह ‘रिकवरी जोन’ हैं.
एनडीए को न केवल पुराने नुकसान की भरपाई करनी है, बल्कि अपनी उपस्थिति को मजबूत करने का भी मौका है. महागठबंधन, दूसरी ओर, पिछली जीत को दोहराने के मूड में है और राहुल गांधी, तेजस्वी यादव जैसे नेता लगातार इन जिलों में रैलियां कर रहे हैं. इन 11 जिलों की 61 सीटों के नतीजे ही तय करेंगे कि 2025 का बिहार किस गठबंधन की ओर झुकेगा, सत्ता में वापसी या नया समीकरण.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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