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Bihar Bhumi: जमीन दस्जावेजों के डिजिटाइजेशन का काम बेहद धीमा, तीन साल में मात्र 4 लाख डीड हुआ डिजिटाइज्ड

Updated at : 12 Dec 2025 11:45 AM (IST)
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Bihar Bhumi: जमीन दस्जावेजों के डिजिटाइजेशन का काम बेहद धीमा, तीन साल में मात्र 4 लाख डीड हुआ डिजिटाइज्ड

Bihar Bhumi: 78 लाख दस्तावेज काे डिजिटाइज्ड किया जाना है. अब तक 04 लाख के करीब दस्तावेज का डिजिटाइजेशन कर लिया गया है. अधिकृत एजेंसी के कार्य की गति काफी कमजोर बतायी जा रही है.

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Bihar Bhumi: दरभंगा.राजकुमार रंजन. अभिलेखागार में रखे जमीनों के दस्तावेजों का डिजिटाइज्ड किया जा रहा है. पहले चरण में 1908 से 1989 तक के दस्तावेज पर काम हो रहा है. काम पूरा हो जाने के बाद लोगों को दस्तावेज का सच्ची प्रतिलिपि लेने के लिए निबंधन कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. लोग घर बैठे जमीनों के दस्तावेज का ऑनलाइन तहकीकात कर सकते हैं. जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन का कार्य प्रारंभ हुआ था. 78 लाख दस्तावेज काे डिजिटाइज्ड किया जाना है. अब तक 04 लाख के करीब दस्तावेज का डिजिटाइजेशन कर लिया गया है. अधिकृत एजेंसी के कार्य की गति काफी कमजोर बतायी जा रही है.

क्या है योजना

जानकारी के अनुसार दस्तावेजों का पहले एजेंसी द्वारा स्कैनिंग किया जाना है. स्कैनिंग के उपरांत क्रॉपिंग किया जायेगा. क्रॉपिंग के उपरांत दस्तावेज को अपलोड किया जाना है. अपलोड के उपरांत संबंधित दस्तावेजों का अंचल, मौजा, थाना, खाता, खेसरा, क्रेता, विक्रेता के अनुसार इंडेक्स तैयार होगा. इसके बाद अवर निबंधक के लागिन में अप्रूवल के लिए डाला जायेगा. अप्रूवल मिलने के बाद संबंधित एजेंसी द्वारा विभागीय ऐप मेटा डाटा एंट्री में उसे अपलोड किया जाना है. इसके बाद फिर से अप्रूवल के लिए मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन कार्यालय पटना को इसे भेजा जाएगा. वहां से अप्रूवल मिलने के बाद ही पब्लिक डोमेन में डाटा डाला जाएगा, ताकि आम पब्लिक विभागीय वेबसाइट पर अपने भूमि दस्तावेज की जानकारी प्राप्त कर सके.

क्या मिलेगी सुविधा

  • काम पूरा हो जाने के बाद लोग ऑन लाइन देख सकेंगे जमीन की स्थिति
  • दस्तावेज की प्रतिलिपि लेना होगा आसान
  • साल 2023 से हो रहा दस्तावेजों को डिजिटल बनाने का काम

दस्तावेज पढ़ने में असुविधा

विभागीय जानकारी के अनुसार एजेंसी के कर्मियों को अरबी, फारसी एवं कैथी में लिखे दस्तावेज पढ़ने में असुविधा हुई. इससे कुछ समय के लिये काम बाधित रहा. एजेंसी के कई कर्मी कार्य छोड़कर चले गए थे. बाद में फिर से काम प्रारंभ हुआ. रजिस्टर्ड दस्तावेज डिजिटल रूप से तैयार हो जाने पर फाइल गुम या नष्ट होने की चिंता समाप्त हो जाएगी. रखरखाव पर ज्यादा खर्चा नहीं होगा. जमीन रजिस्ट्री में धोखाधड़ी की शिकायतें कम हो जाएगी. जमीन की रजिस्ट्री से पूर्व खरीदार, रजिस्ट्री ऑफिस या ऑनलाइन तरीके से विभागीय वेबसाइट पर जाकर जमीन की तहकीकात कर सकेंगे. रजिस्ट्री ऑफिस भी बिना समय गंवाये जमीन का पूरा डिटेल देख सकेगा.

क्या कहते हैं अधिकारी

जिला अवर भूमि निबंधन पदाधिकारी स्वीटी सुमन ने इस मसले पर कहा कि वर्ष 1908 से लेकर 1989 तक के भूमि दस्तावेज को डिजिटल किया जा रहा है. ताकि आम लोग घर बैठे अपने दस्तावेज का विभागीय वेबसाइट पर तहकीकात कर सके. दस्तावेज डिजिटल होने के उपरांत जमीन रजिस्ट्री में धोखाधड़ी की शिकायतें कम हो जाएगी. लोगों को दस्तावेज गुम या नष्ट होने की चिंता समाप्त हो जाएगी.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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