बिहार के कलाकारों को हर महीने मिलेगा पेंशन, 13.53 लाख की स्कालरशिप, हर जिले में बनेगा अटल कला भवन

Bihar: कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार
Bihar News: बिहार सरकार कला और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कलाकार पेंशन, गुरु-शिष्य परंपरा, अटल कला भवन, फिल्म नीति और छठ महापर्व को यूनेस्को सूची में शामिल कराने की पहल से बिहार की सांस्कृतिक विरासत को नया सम्मान और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है.
Bihar Art and Culture News: बिहार सरकार ने कला और संस्कृति को नई पहचान देने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं. कलाकारों को पेंशन, गुरु-शिष्य परंपरा से लुप्त कलाओं का संरक्षण, अटल कला भवनों का निर्माण और फिल्म नीति के जरिए राज्य को रचनात्मक केंद्र बनाया जा रहा है. सम्मान, प्रशिक्षण और अवसरों के साथ बिहार की सांस्कृतिक विरासत सशक्त हो रही है.
कलाकारों के लिए सरकार की बड़ी योजनाएं
1. मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना
राज्य सरकार ने जीवनभर कला को समर्पित करने वाले बुजुर्ग, उपेक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों के लिए यह योजना शुरू की है. इसमे पात्र कलाकारों को ₹3000 हर महीने पेंशन मिलेगी. अब तक 10 जिलों के 85 कलाकारों का चयन किया गया है. आवेदन की प्रक्रिया अगस्त 2025 से जारी है.
2. मुख्यमंत्री गुरु-शिष्य परंपरा योजना
इस योजना का उद्देश्य लुप्त हो रही कलाओं को बचाना है. इसमे अनुभवी कलाकार गुरु बनेंगे और युवा शिष्य. लोक कला, संगीत, नृत्य और वादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा. अब तक 233 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी समीक्षा चल रही है.
3. अटल कला भवन निर्माण योजना
राज्य के सभी जिलों में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 620 सीटों वाले अटल कला भवन बनाए जा रहे हैं. सारण, गया, पूर्णिया, सहरसा, बेगूसराय, मुंगेर और दरभंगा में भवन बनकर तैयार हैं. कई जिलों में निर्माण कार्य जारी है.
अन्य प्रमुख उपलब्धियां
- 52 कलाकारों को बिहार कला सम्मान, ₹27 लाख की पुरस्कार राशि वितरित
- 3800 से अधिक कलाकारों का ऑनलाइन पंजीकरण
- बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति के तहत 30 से अधिक फिल्मों और वेब सीरीज़ की शूटिंग
- युवाओं को कला शिक्षा के लिए ₹13.53 लाख की छात्रवृत्ति
- अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI गोवा) में बिहार की प्रभावी भागीदारी
- बिहार फिल्म एवं ड्रामा संस्थान की स्थापना को सैद्धांतिक मंजूरी
- झिझिया लोकनृत्य का रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज
- वैशाली में बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप का निर्माण पूरा
अब इंटरनेशल होगा छठ महापर्व
बिहार और उत्तर प्रदेश सहित पूर्वी भारत का प्रमुख त्योहार छठ महापर्व अब अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ रहा है. बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग ने इसे यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल कराने के लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से अनुरोध किया है.
कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव ने क्या कहा ?
कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने बताया कि छठ महापर्व सूर्य देव की पूजा से जुड़ा एक अनोखा पर्व है. यह पर्व प्रकृति और पर्यावरण के संतुलन, आपसी भाईचारे, पवित्रता और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक है. इसमें लोकगीत, पारंपरिक अनुष्ठान और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक परंपराएँ शामिल हैं. राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद छठ महापर्व को दुनिया भर में पहचान मिलेगी.
पहचान दिलाने में जुटी सरकार
बिहार सरकार लगातार कला, संस्कृति और विरासत को संरक्षित करने और उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए ठोस कदम उठा रही है. छठ महापर्व को यूनेस्को की सूची में शामिल कराने का प्रयास इसी दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है.
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लेखक के बारे में
By Nishant Kumar
Nishant Kumar: निशांत कुमार पिछले तीन सालों से डिजिटल पत्रकारिता कर रहे हैं. दैनिक भास्कर के बाद राजस्थान पत्रिका के डिजिटल टीम का हिस्सा रहें. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के नेशनल-इंटेरनेशनल और स्पोर्ट्स टीम में काम कर रहे हैं. किस्सागोई हैं और देश-विदेश की कहानियों पर नजर रखते हैं. साहित्य पढ़ने-लिखने में रुचि है.
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