सफलता शराबबंदी की कहानी सीतामढ़ी से : शराब छोड़ते ही मायके से घर लौट आयी उर्मिला
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Nov 2016 5:51 AM
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सूबे में लागू पूर्ण शराबबंदी ने नगर के वार्ड नंबर 19 डुमरवाना निवासी जादोलाल पटेल की जिंदगी बदल दी है. जादोलाल राजमिस्त्री के साथ मजदूरी का काम करके परिवार का पालन करता था. शराब की लत ने उसके भरे-पूरे परिवार की खुशियां छीन ली थी. प्रतिदिन शराब पीकर घर लौटना उसकी आदत बन गयी थी. […]
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सूबे में लागू पूर्ण शराबबंदी ने नगर के वार्ड नंबर 19 डुमरवाना निवासी जादोलाल पटेल की जिंदगी बदल दी है. जादोलाल राजमिस्त्री के साथ मजदूरी का काम करके परिवार का पालन करता था. शराब की लत ने उसके भरे-पूरे परिवार की खुशियां छीन ली थी. प्रतिदिन शराब पीकर घर लौटना उसकी आदत बन गयी थी. कमाई का 80 फीसदी हिस्सा उसका शराब में खर्च हो जाता था.
तीन बच्चों एवं पति-पत्नी के लिए वह खर्च भी नहीं जुटा पाता था. रोज शाम में पत्नी एवं बच्चों के साथ मारपीट करना उसकी आदत बन गयी थी. पत्नी उर्मिला देवी तंग आकर अक्सर अपने मायके में बच्चों के साथ भाग जाती थी. शराबबंदी के बाद भी जादोलाल शराब पीना नहीं छोड़ा. शाम ढलते ही वह सीमापार नेपाल के गौर में रोज शराब पीने चला जाता था. अप्रैल में जादोलाल एक दिन शराब पीकर लौट रहा था.
पुलिस ने पकड़ कर जेल भेज दिया. घर की माली स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण उसकी जमानत भी नहीं हो रही था. बाद में ग्रामीणों ने कुछ चंदा जमा करके जादोलाल की जमानत दो महीने के बाद करायी. जादोलाल ने जेल में ही कसम खा ली थी कि अब शराब को हाथ नहीं लगायेगा. उसने शराब को तोबा कर दी है. अब शराब के नाम से ही जादोलाल को नफरत हो गयी है. तीन भाइयों में जादोलाल की एक भाई की मौत पहले ही हो चुकी है. एक भाई अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहता है. अब उसकी जिंदगी फिर से पटरी पर लौट गयी है.
पत्नी उर्मिला देवी कहती है कि जब से उसका पति जेल से लौटा है उसकी आदत ही बदल गयी है. उसने अपने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू कर दिया है. रोज-रोज के झगड़े विवाद से भी अब मुक्ति मिल गयी है. उर्मिला अब अपने मायके से लौटकर अपने घर आ गयी है. उसने कहा कि पति की कमाई से घर का खर्चा चल रहा है. साथ हीं उर्मिला खुद घरेलू काम से फुरसत निकाल कर कुछ करना चाहती है. उसने सरकार के पूर्ण शराबबंदी कानून की सराहना करते हुए कहा कि शराबबंदी के कारण मेरे जैसे अब कितने उजड़ते परिवार बस जायेंगे.
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