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अनंत सिंह पर लगा क्राइम कंट्रोल एक्ट, जेल में रहने की अवधि बढ़ी

Updated at : 27 Sep 2016 7:13 PM (IST)
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अनंत सिंह पर लगा क्राइम कंट्रोल एक्ट, जेल में रहने की अवधि बढ़ी

पटना : गृह विभाग ने जेल में बंद मोकामा विधायक अनंत सिंह पर सीसीए (क्राइम कंट्रोल एक्ट) लगाने से संबंधित प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है. मंगलवार को इस प्रस्ताव पर सहमति प्रदान करने से संबंधित मामले की पुष्टि विभागीय प्रधान सचिव आमिर सुबहानी ने की. उन्होंने कहा कि इस मामले पर आपत्ति जताते […]

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पटना : गृह विभाग ने जेल में बंद मोकामा विधायक अनंत सिंह पर सीसीए (क्राइम कंट्रोल एक्ट) लगाने से संबंधित प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है. मंगलवार को इस प्रस्ताव पर सहमति प्रदान करने से संबंधित मामले की पुष्टि विभागीय प्रधान सचिव आमिर सुबहानी ने की. उन्होंने कहा कि इस मामले पर आपत्ति जताते हुए पटना डीएम से जो सवाल पूछे गये थे, उससे विभाग पूरी तरह से संतुष्ट है. इसके मद्देनजर सीसीए लगाने के प्रस्ताव पर सहमति दे दी गयी है. इससे पहले भी पटना डीएम ने विधायक पर सीसीए लगाने से संबंधित प्रस्ताव तैयार करके गृह विभाग को भेजा था. परंतु गृह विभाग ने यह कह कर इस प्रस्ताव को लौटा दिया था कि जो व्यक्ति पहले से ही जेल में बंद है, उस पर सीसीए लगाकर फिर से जेल में बंद करने का क्या औचित्य है.

जेल के अंदरसे डीएसपी को धमकी बना मुख्य कारण

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गृह विभाग के इस सवाल का ठोस जवाब तैयार करके जिला प्रशासन ने विभाग को सौंपा है, जिसके बाद सीसीए लगाने का फैसला लिया गया है. जिला प्रशासन ने अपनी दलील में कहा है कि विधायक के बाहर आने से राज्य की खासकर शहर की विधि-व्यवस्था पर काफी बुरा असर पड़ेगा. इन्हें जल्द ही बेल मिलने जा रही है, जिसके बाद ये बाहर आ जायेंगे और इनके बाहर आते ही कई तरह की आपराधिक गतिविधि शुरू होने की पूरी आशंका है. इतना ही नहीं इन्होंने जेल के अंदर से भी कई अपराधिक मामलों को अंजाम दिया है. जेल में रहने के दौरान ही इन्होंने अपने मुकदमा में कई गवाहों को धमकी दी है. जेल के अंदर से ही डीएसपी को भी धमकी दी है, जिसकी शिकायत भी डीएसपी ने करवायी है.

एक साल की अवधि बढ़ जायेगी

सीसीए लगने के बाद अब विधायक को कम से कम एक वर्ष के लिए जेल में रहना पड़ सकता है. नियमानुसार, दो महीने के अंदर हाइकोर्ट में आरोपी सीसीए के आदेश को चुनौती दे सकता है. इस पर डीएम को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर सीसीए लगाने का सही और ठोस कारण बताना होगा. इसके बाद ही यह अधिकतम एक वर्ष के लिए बरकरार रह सकता है. अगर न्यायालय को सीसीए लगाने का कारण उचित प्रतित नहीं हुआ, तो आरोपी पर लगा सीसीए निरस्त भी हो सकता है और वह बाहर भी आ सकता है.

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