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शराबबंदी में लापरवाह 11 थानाध्यक्षों के निलंबन से नाराज 250 दारोगाओं ने कहा, नहीं चाहिए थानेदारी

Updated at : 09 Aug 2016 6:37 AM (IST)
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शराबबंदी में लापरवाह 11 थानाध्यक्षों के निलंबन से नाराज 250 दारोगाओं ने कहा, नहीं चाहिए थानेदारी

सौंपा आवेदन पटना : राज्य में पूर्ण शराबबंदी कानून का सख्ती से पालन कराने में 11 थानाध्यक्षों के फेल पाये जाने पर इन्हें निलंबित कर दिया गया था. पुलिस मुख्यालय के इस आदेश के बाद सोमवार को बिहार पुलिस एसोसिएशन की अगुआई में राज्य स्तर पर सभी थानाध्यक्षों ने मोरचा खोल दिया है. इनका कहना […]

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सौंपा आवेदन
पटना : राज्य में पूर्ण शराबबंदी कानून का सख्ती से पालन कराने में 11 थानाध्यक्षों के फेल पाये जाने पर इन्हें निलंबित कर दिया गया था. पुलिस मुख्यालय के इस आदेश के बाद सोमवार को बिहार पुलिस एसोसिएशन की अगुआई में राज्य स्तर पर सभी थानाध्यक्षों ने मोरचा खोल दिया है.
इनका कहना है कि उन्हें थानेदारी नहीं चाहिए. अब तक 250 इंस्पेक्टर और दारोगाओं ने स्वेच्छा से आवेदन करके कहा है कि वे थानाप्रभारी के पद पर काम नहीं करना चाहते हैं. सभी दारोगा और इंस्पेक्टर थानाध्यक्ष एसोसिएशन को अपना आवेदन भेज रहे हैं. इनमें कई वर्तमान थानाप्रभारी भी शामिल हैं. उनका कहना है कि उन्हें थानाध्यक्ष के पद से हटा कर अन्य किसी पद पर तैनात कर दिया जाये. कुछ नहीं, तो इन्हें पुलिस मुख्यालय में पदस्थापित कर दिया जाये.
सोमवार की देर शाम तक अलग-अलग थानों से 250 इंस्पेक्टर और दारोगाओं ने आवेदन दिया था . सबसे ज्यादा आवेदन भोजपुर जिले से आये हैं. दो-तीन दिनों तक सैंकड़ों और आवेदन आने की संभावना है, जिन्हें मुख्यालय को सौंपा जायेगा.
इस मुद्दे पर पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने डीजीपी से भी मुलाकात कर पूरी स्थिति को रखा. एसोसिएशन ने सीएम मुख्यालय में भी ज्ञापन सौंप कर मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा है. डीजीपी ने इनकी बातों को सुना और कहा कि निलंबित सभी 11 थानाध्यक्ष संबंधित जिलों के एसपी के माध्यम से पुलिस मुख्यालय को आवेदन भेजें. इस पर उचित कार्रवाई की जायेगी.
दो दिनों में और दारोगा पुलिस एसोसिएशन को देंगे आवेदन
क्या है मामला
शराबबंदी को सख्ती से लागू कराने में लापरवाही बरतने पर पांच अगस्त को 11 थानाध्यक्षों को निलंबित कर दिया गया था. इन थानाध्यक्षों के क्षेत्र में अवैध शराब तैयार करने के उपकरण और बरतन पाये गये थे.साथ ही छह प्रशिक्षु सिपाहियों को बरखास्त कर दिया गया था.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी हुए एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार ने कहा था कि निलंबित किये गये ये थानाध्यक्ष अब 10 वर्ष तक किसी थाने में बतौर थानाध्यक्ष पदस्थापित नहीं हो सकेंगे. पुलिस एसोिसएशन ने इसका िवरोध िकया था और कहा था िक शराबबंदी की सफलता के िलए पुलिस को श्रेय देने के बदले दंड दिया जा रहा है.
एसपी करें जांच, दोषी हुए, तो करें निलंबित : एसोसिएशन
पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह, उपाध्यक्ष जियाउल्लाह खान और महामंत्री दीनबंधु राम ने कहा कि दो दिनों में सभी आवेदन जमा होने के बाद इन्हें डीजीपी को सौंपा जायेगा. जो थानाध्यक्ष निलंबित हुए हैं, उन पर लगे आरोपों की जांच एसपी से करायी जाये. इसके बाद भी अगर ये दोषी पाये जाते हैं, तो इन्हें निलंबित किया जाये. इनका कहना है कि अवैध शराब बनाने के लिए तसला और महुआ ही चाहिए. एेसे में किसी एक थाना क्षेत्र में सभी लोगों को पकड़ना संभव नहीं होता है.
एसपी के जरिये रिपोर्ट आने पर ही उचित कार्रवाई : एडीजी
एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार ने कहा कि जिन थानाध्यक्षों ने पद से हटने का आवेदन अपने जिले के एसपी को दिया है, तो यह एसपी पर निर्भर करता है कि वे इस पर क्या कार्रवाई करें. एसपी के जरिये इसकी रिपोर्ट मुख्यालय में आने पर उचित कार्रवाई की जायेगी. थाने में कौन रहना चाहते हैं, कौन नहीं, यह एसपी को देखना है.
नौकरी करनी है, तो रहना होगा अनुशासन में : सिद्दीकी
वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि नौकरी करनी है, तो अनुशासन में रहना होगा. इस बयान को थानाध्यक्षों को चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.
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