वीमेंस कॉलेज को फटकार, 15 दिनों में परीक्षा लेने का आदेश

Updated at : 21 Apr 2016 5:52 AM (IST)
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वीमेंस कॉलेज को फटकार, 15 दिनों में परीक्षा लेने का आदेश

पटना : कम उपस्थिति के कारण स्नातक की परीक्षा से वंचित की गयी पटना वीमेंस कॉलेज की 315 छात्राएं अब परीक्षा दे सकेंगी. पटना हाइकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश इकबाल अहमद अंसारी और अंजना मिश्र के खंडपीठ ने इस मामले की दायर लोकहित याचिका की सुनवाई करते हुए बुधवार को यह आदेश दिया. कोर्ट ने […]

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पटना : कम उपस्थिति के कारण स्नातक की परीक्षा से वंचित की गयी पटना वीमेंस कॉलेज की 315 छात्राएं अब परीक्षा दे सकेंगी. पटना हाइकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश इकबाल अहमद अंसारी और अंजना मिश्र के खंडपीठ ने इस मामले की दायर लोकहित याचिका की सुनवाई करते हुए बुधवार को यह आदेश दिया. कोर्ट ने 15 दिनों के अंदर परीक्षा लेने और उसके बाद ही स्नातक की परीक्षा का रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने इस मामले में पटना विवि के कुलपति और वीमेंस कॉलेज की प्राचार्य को भी तलब किया था.
कोर्ट ने पटना विवि और काॅलेज प्रशासन को उसके रवैये को लेकर फटकार भी लगायी. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिन छात्राओं की उपस्थिति 60 प्रतिशत है, उन्हें कुलपति और जिनकी 70 फीसदी है, उन्हें कॉलेज की प्राचार्य परीक्षा में बैठने की अनुमति देंगी. कोर्ट के 15 दिनों के अंदर परीक्षा लेने और स्टेटस रिपोर्ट देने को भी कहा है.
इससे पहले 17 मार्च को हाइकोर्ट ने परीक्षा का रिजल्ट निकालने पर रोक लगा दी थी. उस समय पटना विवि के कुलपति डॉ वाइसी सिम्हाद्रि ने कोर्ट में कहा था कि मैं विद्यार्थियों की उपस्थिति को लेकर अपने विशेषाधिकार का उपयोग नहीं करूंगा.
75% उपस्थिति नहीं होने पर फॉर्म भरने से रोका था आंदोलन के बाद भी एक न सुनी थी कॉलेज नेक्लास में 75% की उपस्थिति नहीं होने पर पटना वीमेंस काॅलेज की स्नातक पार्ट वन व थर्ड की 315 छात्राओं को काॅलेज और पटना विवि प्रशासन ने परीक्षा फाॅर्म भरने से मना कर दिया था. समय पर मेडिकल जमा करनेवाली छात्राओं को भी फॉर्म भरने से वंचित कर दिया गया था.
इसके खिलाफ कॉलेज की छात्राएं 27 जनवरी को सड़क पर उतरी थीं. छात्राओं का यह आंदोलन कई दिनों तक जारी रहा, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने एक न सुनी. राजभवन ने कई बार छात्राओं को अपनी बात रखने के लिए बुलाया, लेकिन हल नहीं हो पाया. तब छात्र संगठन एआइएसएफ ने इन छात्राओं की ओर से हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है.
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