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आशियाना फर्जी मुठभेड़ मामला : तत्कालीन थाना अध्यक्ष सहित आठों आरोपी बरी

Updated at : 04 Nov 2015 4:45 PM (IST)
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आशियाना फर्जी मुठभेड़ मामला : तत्कालीन थाना अध्यक्ष सहित आठों आरोपी बरी

पटना : पटनाहाईकोर्ट नेबुधवार को आशियाना नगर क्षेत्र में 12 वर्ष पूर्व फर्जी पुलिस मुठभेड़ में तीन छात्रों की हत्या के मामले में शास्त्रीनगर थाना के तत्कालीन प्रभारी शम्स आलम तथा आरक्षी अरुण कुमार सिंह सहित आठ आरोपियों को संदेह के लाभ के आधार पर आज बरी कर दिया. पटना व्यवहार न्यायालय के त्वरित न्यायालय […]

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पटना : पटनाहाईकोर्ट नेबुधवार को आशियाना नगर क्षेत्र में 12 वर्ष पूर्व फर्जी पुलिस मुठभेड़ में तीन छात्रों की हत्या के मामले में शास्त्रीनगर थाना के तत्कालीन प्रभारी शम्स आलम तथा आरक्षी अरुण कुमार सिंह सहित आठ आरोपियों को संदेह के लाभ के आधार पर आज बरी कर दिया.

पटना व्यवहार न्यायालय के त्वरित न्यायालय :प्रथम: के न्यायाधीश रविशंकर सिन्हा ने 28 दिसंबर 2002 को आशियाना नगर इलाके के एक मार्केट में फर्जी मुठभेड़ में तीन छात्रों विकास रंजन, प्रशांत सिंह और हिमांशु शेखर की हत्या मामले में पिछले साल 24 जून को आलम को फांसी और सिंह को ताउम्र आजीवन कारावास तथा कमलेश कुमार गौतम, राजू रंजन, सोनी रजक, कुमोद कुमार, राकेश कुमार मिश्रा और अनिल को उम्रकैद की सजा सुनायी थी.

अभियुक्तों द्वारा इस मामले में पटना उच्च न्यायालय में अपील दायर किए जाने पर न्यायमूर्ति वीएन सिन्हा और न्यायमूर्ति जितेंद्र मोहन शर्मा की खंडपीठ ने संदेह के लाभ के आधार पर आज सभी आठों आरोपियों को बरी कर दिया. खंडपीठ ने बिहार सरकार को पीड़ित मुआवजा कोष से मृतक छात्रों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये मुआवजा के तौर पर दिए जाने का भी निर्देश दिया है.

इन अभियुक्तों पर एक एसटीडी बिल की राशि के भुगतान को लेकर टेलीफोन बूथ आपरेटर और इन छात्रों के बीच हुई झड़प के दौरान उक्त मार्केट के अन्य दुकानदारों के साथ मिलकर उनकी बुरी तरह से पिटाई करने का आरोप था. इस घटना के बारे में जानकारी मिलने पर आरक्षी सिंह के साथ घटनास्थल पहुंचे आलम ने इन छात्रों के सिर में गोली मारने के बाद उन्हें डकैत के रुप में पेश किया था.

इस मामले की सूचना देने वाले मृतक छात्रों में से एक विकास रंजन के भाई मुकेश रंजन थे. इस मामले की जांच का जिम्मा अपराध अनुसंधान विभाग दिया गया जिसे बाद में सीबीआई के पास भेज दिया गया था. कुल 33 लोगों ने इस मामले में गवाही दी थी. इस मामले में आलम वर्ष 2003 से जेल में बंद थे. जबकि बाकी अन्य सात अभियुक्तों को अदालत द्वारा गत 05 जून को दोषी करार दिए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था.

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