चुनाव की घोषणा से डेढ़ घंटा पहले केंद्र ने बढ़ाया महंगाई भत्ता आधा घंटे बाद राज्य ने भी
Updated at : 10 Sep 2015 6:13 AM (IST)
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नयी दिल्ली/पटना : सरकारी कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता 6% बढ़ा कर 119% कर दिया गया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को बिहार चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के महज डेढ़ घंटा पहले यह निर्णय लिया. केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारियों व 56 लाख पेंशनभोगियों को इसका फायदा होगा. केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक […]
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नयी दिल्ली/पटना : सरकारी कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता 6% बढ़ा कर 119% कर दिया गया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को बिहार चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के महज डेढ़ घंटा पहले यह निर्णय लिया. केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारियों व 56 लाख पेंशनभोगियों को इसका फायदा होगा.
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार हर छह महीने में महंगाई भत्ते की समीक्षा करती है. इस बार महंगाई भत्ते में मौजूदा 113 प्रतिशत के ऊपर छह प्रतिशत वृद्धि का फैसला किया है. कर्मचारियों को एक जुलाई 2015 से महंगाई भत्ते की और पेंशनभोगियों को महंगाई राहत की एक अतिरिक्त किस्त जारी करने का फैसला किया गया.
इस वृद्धि से सरकारी खजाने पर सालाना 6,655.14 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा. यह वृद्धि स्वीकार्य फार्मूला के अनुसार की गयी है. यह फार्मूला छठे केंद्रीय वेतन आयोग पर आधारित है. पूर्व में सरकार ने अप्रैल में महंगाई भत्ते को बढ़ा कर 113% किया था.
आधा घंटे बाद राज्य ने भी महंगाई भत्ता (डीए) देने का फैसला किया
पटना. केंद्र सरकार के निर्णय के तुरंत बाद राज्य सरकार ने भी अपने कर्मचारियों छह प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई भत्ता (डीए) देने का फैसला किया. अब सभी कर्मचारियों को 119 प्रतिशत डीए मिलेगा. केंद्रीय कैबिनेट के निर्णय के तुरंत बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आनन-फानन में इससे संबंधित फाइल मंगवायी और दोपहर दो बजे के पहले ही इस पर हस्ताक्षर कर दिये.
इससे राज्य के करीब 2.70 लाख सरकारी कर्मचारियों और करीब 2.50 पेंशनधारकों को लाभ मिलेगा. यह डीए कर्मियों को उनके मूल वेतन पर दिया जायेगा. यह भत्ता सितंबर के वेतन में ही जोड़ कर दिया जायेगा. जबकि पिछले महीनों के बकाये का भुगतान अक्तूबर के वेतन में जोड़ कर किया जायेगा. हालांकि, राज्य कर्मचारियों को उनके भत्तों काे मूल वेतन में जोड़ कर डीए देने की योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी. इस पर वित्त विभाग की तरफ से अंतिम सहमति नहीं बनने के कारण यह चुनावी आचार संहिता में उलझ गया.
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